प्रति एकड़ और जिलावार खरीद सीमा तय करने का आरोप; सरकार से पूरी उपज की सुचारु खरीद और एमएसपी सुनिश्चित करने की मांग
चंडीगढ़, 26 सितंबर। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर धान खरीद के लिए प्रति एकड़ सीमा तय करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सीमा से अधिक उपज मंडी में लाने पर किसान को सरकारी जांच का सामना करना पड़ रहा है। सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि बेहतर मेहनत और अच्छी पैदावार करना किसान का अपराध कैसे हो सकता है?
एक बयान में सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के लिए एक के बाद एक पाबंदियां लागू कर रही है। उनके अनुसार, पहले पराली के नाम पर किसानों के खेतों और जोत को करीब 30 महीने तक ‘रेड एंट्री’ में उलझाया गया, फिर तैयार फसल की कटाई पर पाबंदियां लगाई गईं और अब उपज की सरकारी खरीद पर सीमा लगा दी गई है।
जिलावार सीमा पर भी उठाए सवाल
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि इस बार जिलावार धान खरीद की सीमा भी तय की गई है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी खरीद व्यवस्था कमजोर होगी और किसानों को अपनी फसल निजी व्यापारियों को उनकी तय कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “दुनिया भर में किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और पैदावार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हरियाणा में स्थिति उलटी हो गई है। किसान अधिक धान पैदा करे तो उसकी उपज की खरीद पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।” सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि ‘एक-एक दाना खरीदने’ का वादा अब चुनावी नारा बनकर रह गया है।
केंद्र से मिली खरीद सीमा पर जवाब मांगा
सुरजेवाला ने दावा किया कि पिछले वर्ष हरियाणा में 62 लाख टन से अधिक धान की सरकारी खरीद हुई थी, जबकि इस वर्ष केंद्र सरकार ने राज्य को केवल 58 लाख टन की सीमा दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पूछा कि राज्य सरकार ने किसानों के हित में इस सीमा का विरोध क्यों नहीं किया और अधिक खरीद की मांग क्यों नहीं उठाई।
सुरजेवाला ने कहा कि खेती हरियाणा की पहचान और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। उनका आरोप है कि खरीद पर लगाई जा रही सीमाओं से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने इसे एमएसपी पर ‘तालाबंदी’ की कोशिश करार दिया।
‘किसानों के हक पर हमला स्वीकार नहीं’
मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने तीन कृषि कानूनों का विरोध किया था और वे खरीद व्यवस्था को कमजोर करने वाले कदम भी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां सरकारी खरीद को सीमित कर निजी व्यापारियों को लाभ पहुंचा सकती हैं।
सुरजेवाला ने मांग की कि सरकार धान खरीद की प्रति एकड़ और जिलावार सीमाओं पर स्थिति स्पष्ट करे, मंडियों में खरीद सुचारु रखे और किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य बिना परेशानी दिलाए।








