चार श्रम संहिताएं रद्द करने, ₹42 हजार न्यूनतम वेतन और ठेका प्रथा समाप्त करने की उठाई मांग

गुड़गांव, 10 अगस्त। देशव्यापी जेल भरो सत्याग्रह के आह्वान पर सोमवार को गुड़गांव में ट्रेड यूनियन काउंसिल के बैनर तले विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े हजारों मजदूरों और कर्मचारियों ने डीसी कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया तथा गिरफ्तारियां दीं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की कथित मजदूर, कर्मचारी एवं किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
विरोध सभा के संचालन के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष मंडल गठित किया गया। इसमें एटक के अनिल पवार, टीयूसी के सुरेश नारा, एआईयूटीयूसी के बलवान सिंह, इंटक के प्रतिनिधि तथा एचएमएस के एस. यादव शामिल रहे।
सभा को एटक के अनिल पवार, सीटू के दिनेश, जनवादी महिला समिति की सरोहा, आशा वर्कर यूनियन की वीरमति, सर्व कर्मचारी संघ के करोथा तथा नगर निगम कर्मचारी यूनियन और बिजली कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।
स्थायी रोजगार के अवसर घटाने का आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण स्थायी रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सभी मजदूरों को स्थायी रोजगार देने, स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा उद्योगों एवं सरकारी विभागों से ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने और नगर निगम के कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा।
₹42 हजार न्यूनतम वेतन की मांग
ट्रेड यूनियनों की ओर से प्रस्तुत मांग-पत्र में सभी श्रमिकों के लिए ₹42 हजार प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अलावा मनरेगा के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को साल में 200 दिन काम और कम से कम ₹700 प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी देने तथा बिजली निजीकरण से जुड़े प्रस्ताव वापस लेने की मांग उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों, किसानों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर पूरे देश में संघर्ष जारी है। यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। ट्रेड यूनियन काउंसिल ने कहा कि रोजगार, सम्मानजनक मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा के सवालों को लेकर आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।








