राष्ट्रीय ध्वज केवल सजावट की वस्तु नहीं, देश की स्वतंत्रता, एकता और स्वाभिमान का प्रतीक है;
इसे फहराने से लेकर सुरक्षित रखने तक नियमों का पालन प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य
ऋषिप्रकाश कौशिक
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है। घरों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर नागरिक देश के प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करते हैं। यह अभियान देशभक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का सुंदर माध्यम है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य केवल अधिक से अधिक तिरंगे लगाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है।
अक्सर देखने में आता है कि उत्सव समाप्त होने के बाद तिरंगे सड़कों, नालियों, कूड़ेदानों और सार्वजनिक स्थानों पर पड़े मिलते हैं। कुछ ध्वज वाहनों से टूटकर सड़क पर गिर जाते हैं तो कुछ बारिश में भीगकर फट जाते हैं। देशभक्ति का प्रतीक यदि अगले ही दिन पैरों के नीचे दिखाई दे, तो यह अभियान की भावना के बिल्कुल विपरीत है। इसलिए ‘हर घर तिरंगा’ के साथ ‘हर तिरंगे का सम्मान’ भी हमारा संकल्प होना चाहिए।
कौन फहरा सकता है राष्ट्रीय ध्वज?
भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के अनुसार कोई भी नागरिक, निजी संस्था अथवा शैक्षणिक संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान का पालन करते हुए इसे किसी भी दिन और अवसर पर फहरा सकता है। तिरंगा फहराना केवल सरकारी कार्यालयों या राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं है।
वर्ष 2022 में ध्वज संहिता में किए गए संशोधन के बाद आम नागरिक अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज दिन और रात दोनों समय फहरा सकते हैं। हालांकि रात में ध्वज ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां वह सम्मानपूर्वक और स्पष्ट रूप से दिखाई दे तथा जमीन या आसपास की वस्तुओं से न टकराए।
कैसा होना चाहिए हमारा तिरंगा?
राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होना चाहिए और उसकी लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना अनिवार्य है। उसमें समान चौड़ाई की तीन पट्टियां होती हैं—सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग।
सफेद पट्टी के मध्य गहरे नीले रंग का अशोक चक्र होना चाहिए, जिसमें 24 तीलियां हों। ध्वज किसी भी आकार का हो सकता है, लेकिन उसका अनुपात और मूल स्वरूप नहीं बदलना चाहिए।
ध्वज संहिता के अनुसार तिरंगा हाथ से काते-बुने अथवा मशीन से बने सूती, पॉलिएस्टर, ऊनी, रेशमी या खादी के कपड़े का हो सकता है। ध्वज साफ-सुथरा और अच्छी स्थिति में होना चाहिए। फटा, मैला, विकृत अथवा फीके रंग वाला राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराना चाहिए।
तिरंगा फहराते समय इन बातों का रखें ध्यान
राष्ट्रीय ध्वज को हमेशा सम्मानजनक और प्रमुख स्थान पर लगाया जाना चाहिए। उसे ऐसी ऊंचाई पर लगाएं कि वह जमीन, फर्श, पानी, पेड़, दीवार अथवा किसी अन्य वस्तु को न छुए।
ध्वज को क्षैतिज रूप में लगाया जाए तो केसरिया पट्टी ऊपर रहनी चाहिए। यदि दीवार पर लंबवत लगाया जाए तो देखने वाले व्यक्ति की दृष्टि से केसरिया भाग बाईं ओर होना चाहिए।
ध्वज को फहराते समय तेजी से ऊपर चढ़ाना और उतारते समय धीरे-धीरे तथा सम्मानपूर्वक नीचे लाना चाहिए। ध्वज को उतारने के बाद व्यवस्थित ढंग से मोड़कर स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
यदि राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसी संस्था, संगठन या अन्य देश का ध्वज लगाया जा रहा है, तो किसी दूसरे ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या उससे अधिक प्रमुख स्थान नहीं दिया जा सकता।
इन कार्यों से होता है तिरंगे का अपमान
राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग पर्दे, मेजपोश, मंच, वक्ता की मेज, भवन अथवा प्रतिमा को ढकने के लिए नहीं किया जा सकता। इसे सजावटी झालर, बंदनवार या लपेटने वाली सामग्री के रूप में भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
तिरंगे पर किसी प्रकार का नाम, नारा, संदेश, चित्र या अक्षर नहीं लिखना चाहिए। राजनीतिक दल, संस्था, कंपनी अथवा व्यक्ति अपने प्रचार के लिए उस पर अपना चिह्न या विज्ञापन भी नहीं लगा सकते।
राष्ट्रीय ध्वज को जानबूझकर जमीन, फर्श या पानी को छूने देना, उल्टा लगाना, फाड़ना, जलाना, विकृत करना अथवा पैरों से रौंदना उसका अपमान है। किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए तिरंगे को झुकाना भी नियमों के विरुद्ध है।
तिरंगे में फूलों की पंखुड़ियां रखी जा सकती हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त उसे किसी वस्तु को रखने, ले जाने या बांधने के पात्र के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
वाहनों पर हर कोई नहीं लगा सकता तिरंगा
आम नागरिकों को कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर अथवा अन्य वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी वाहन के बोनट, छत, पीछे अथवा किनारों को तिरंगे से ढकना प्रतिबंधित है। वाहन पर निर्धारित डंडे में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार भी केवल ध्वज संहिता में वर्णित कुछ विशिष्ट संवैधानिक पदाधिकारियों को है।
छोटे प्लास्टिक या कागज के तिरंगे गाड़ी, मोटरसाइकिल या साइकिल पर ऐसे न लगाएं कि गति के कारण वे फट जाएं अथवा सड़क पर गिर जाएं। राष्ट्रीय ध्वज देशभक्ति दिखाने का साधन है, वाहन की सजावट का सामान नहीं।
पोशाक और अन्य वस्तुओं पर तिरंगा
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मानजनक चित्रण पोशाक के ऊपरी भाग पर किया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल कमर से नीचे पहने जाने वाले कपड़ों पर नहीं होना चाहिए। तिरंगे को रूमाल, नैपकिन, तकिया, कुशन, अंतर्वस्त्र अथवा ऐसी सामग्री पर छापना या कढ़ाई करना अनुचित और प्रतिबंधित है।
इसी तरह राष्ट्रीय ध्वज को प्लेट, गिलास, पैकेट या ऐसी वस्तुओं पर नहीं छापना चाहिए, जिन्हें इस्तेमाल के बाद कूड़े में फेंक दिया जाता हो।
आधा झुका ध्वज कब फहराया जाता है?
राष्ट्रीय ध्वज को कोई व्यक्ति या संस्था अपनी इच्छा से आधा नहीं झुका सकती। किसी विशिष्ट व्यक्ति के निधन पर राजकीय शोक के दौरान इसे आधा झुकाने का निर्णय और निर्देश केवल सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। सरकारी निर्देश के बिना तिरंगे को आधा झुकाकर फहराना ध्वज का अनादर माना जाता है।
बारिश और खराब मौसम में क्या करें?
आम नागरिकों के लिए बारिश में राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ध्वज की गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है। यदि तेज वर्षा, आंधी या तूफान से उसके फटने, गिरने, कीचड़ में जाने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका हो तो उसे सम्मानपूर्वक उतार लेना ही उचित है।
गीले ध्वज को मोड़कर न रखें। पहले उसे स्वच्छ स्थान पर पूरी तरह सुखाएं और फिर सम्मानपूर्वक मोड़कर सुरक्षित रखें।
कार्यक्रम के बाद तिरंगे का क्या करें?
‘हर घर तिरंगा’ अभियान समाप्त होते ही ध्वज को फेंकना आवश्यक नहीं है। यदि वह साफ और सुरक्षित है तो उसे सम्मानपूर्वक मोड़कर ऐसी जगह रखा जा सकता है, जहां उसका अपमान न हो। अगले राष्ट्रीय पर्व अथवा अन्य अवसर पर उसका दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
कागज के छोटे ध्वजों को कार्यक्रम के बाद जमीन पर नहीं फेंकना चाहिए। बच्चों और कार्यक्रम आयोजकों को पहले ही इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। आयोजन के बाद स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी तय हो कि वे आसपास पड़े तिरंगों को सम्मानपूर्वक एकत्र करें।
क्षतिग्रस्त तिरंगे का निस्तारण कैसे हो?
यदि राष्ट्रीय ध्वज फट गया हो, बहुत मैला हो गया हो अथवा उपयोग योग्य न रहा हो तो उसे कूड़ेदान में नहीं डालना चाहिए। ध्वज संहिता के अनुसार ऐसे ध्वज को उसकी गरिमा बनाए रखते हुए निजी रूप से पूर्णतः नष्ट किया जाना चाहिए—अधिमानतः सम्मानपूर्वक जलाकर या किसी अन्य ऐसे तरीके से, जिससे उसकी प्रतिष्ठा बनी रहे।
यह कार्य सार्वजनिक प्रदर्शन, उत्सव या वीडियो बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। ध्वज को साफ-सुथरे स्थान पर अकेले और पूरी गरिमा के साथ नष्ट किया जाए। कागज के ध्वजों का भी सम्मानपूर्वक और निजी रूप से निस्तारण किया जाना चाहिए।
प्लास्टिक के तिरंगों से बचना बेहतर
छोटे प्लास्टिक के तिरंगे लंबे समय तक नष्ट नहीं होते और अक्सर कार्यक्रमों के बाद सड़कों तथा कूड़े में पड़े दिखाई देते हैं। इन्हें सम्मानजनक ढंग से नष्ट करना भी कठिन होता है। इसलिए कपड़े अथवा अच्छी गुणवत्ता वाले कागज के ध्वज को प्राथमिकता देना अधिक उचित है।
विक्रेताओं, स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज निर्धारित स्वरूप में हो और अभियान के बाद उसके संग्रह तथा सम्मानजनक निस्तारण की व्यवस्था की जाए।
अपमान पर सजा का प्रावधान
राष्ट्रीय ध्वज का सार्वजनिक रूप से अपमान करना केवल नैतिक भूल नहीं, कानूनी अपराध भी है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को जलाने, विकृत करने, अपवित्र करने, नष्ट करने, पैरों से रौंदने अथवा उसके प्रति अनादर प्रदर्शित करने पर तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर न्यूनतम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान है। भारत सरकार का संबंधित कानून
देशभक्ति केवल तिरंगा लगाने तक सीमित न रहे
‘हर घर तिरंगा’ तभी पूरी तरह सार्थक होगा, जब प्रत्येक घर में ध्वज के साथ उसके सम्मान की समझ भी पहुंचे। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को बताएं कि तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं है। इसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, संविधान के मूल्य और करोड़ों भारतीयों की साझी पहचान जुड़ी हुई है।
15 अगस्त को उत्साह से तिरंगा फहराना देशभक्ति है तो कार्यक्रम के बाद उसे सम्मानपूर्वक उतारना, मोड़ना और सुरक्षित रखना भी उतनी ही बड़ी देशभक्ति है। हमारा संकल्प होना चाहिए—








