प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जल संरक्षित हरियाणा परियोजना’ को मिली स्वीकृति: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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*भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु समयबद्ध तरीके से कार्य करें: मुख्यमंत्री*

चण्डीगढ़, 8 अगस्त: विश्व बैंक द्वारा प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के अंतर्गत 5,714.80 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें से 4 हजार करोड़ रुपये का ऋण विश्व बैंक द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा और शेष 1714.80 करोड़ रुपये राज्यनिधि द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। इस परियोजना के तहत राज्य में 15 क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिनका कुल क्षेत्रफल 48.94 लाख एकड़ है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को लेकर स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी-सी (SFC-C) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में  कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी  भी उपस्थित थे।

विभाग ने बताया कि ‘जल संरक्षित हरियाणा’ एक फ्लैगशिप एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम है। इसके माध्यम से वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों में चरणबद्ध रूप से कार्य किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग नहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके अंतर्गत विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से 2,484.87 करोड़ रुपये की लागत से 104 नहरों का पुनर्वास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MICADA) के माध्यम से 620 वाटर कोर्सेज (खालों) का पुनरुद्धार किया जाएगा, जिससे 3.18 लाख एकड़ भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी, जिससे 56,830 एकड़ भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। प्रदेश में 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाएगा। डीएसआर (DSR) तकनीक के माध्यम से 5 लाख एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई और 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण (MPMV) को अपनाने के लिए कार्य किए जाएंगे। फसल विविधीकरण, धान की सीधी बिजाई और अन्य उपायों के माध्यम से टिकाऊ एवं जल-संरक्षण आधारित कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा।

*7 जिलों में 131 वाटर बॉडीज का होगा निर्माण*

मुख्यमंत्री ने कहा कि भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हरियाणा के भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी तथा सिरसा सहित 7 जिलों में लगभग 131 नई वाटर बॉडीज का निर्माण किया जाएगा, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, जींद में 2, कैथल में 1 और गुरुग्राम के धनवापुर में 1 प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इन चार एसटीपी (STP) से 28,000 एकड़ क्षेत्र को लाभान्वित किया जाएगा और इस पर 282.13 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक ने इस उपलब्धि के लिए सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना की है। ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना राज्य के जल प्रबंधन दृष्टिकोण में एक “आदर्श बदलाव” साबित होगी। इस परियोजना के पूर्ण होने पर हरियाणा राज्य की सभी नहरों का पुनर्वास संभव हो सकेगा, जिससे प्रदेश की सभी नहरों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना न केवल प्रदेश को जल-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक “मील का पत्थर” साबित होगी, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सतत जल भविष्य सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, वित्त और योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, प्रमुख अभियंता श्री बीरेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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