*रिकवरी बढ़ाने, स्टॉपेज घटाने और उत्पादन लागत कम करने के दिए निर्देश*
*4 फीट की दूरी पर गन्ना बिजाई को मिलेगा बढ़ावा, किसानों से हर चार महिनों में संवाद करेंगे मिलों के प्रबंध निदेशक*

चंडीगढ़,8 अगस्त। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश की सहकारी शुगर मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उत्पादन लागत कम करने, चीनी की रिकवरी बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिलों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को हरियाणा निवास पर हरियाणा स्टेट फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर मिल्स की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिलों के संचालन में अनावश्यक स्टॉपेज को न्यूनतम रखा जाए और मशीनरी की समय पर मेंटेनेंस तथा जरूरी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मिलों के प्रबंध निदेशकों से सीजन के दौरान हुई स्टॉपेज के घंटों की भी जानकारी ली।
*गन्ना तुलाई केंद्रों पर किसानों के सुझाव हेतु लगाई जायेंगी सुझाव पेटियां*
मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि शुगर मिलों के गन्ना तुलाई केंद्रों पर सुझाव पेटियां लगाई जाएं, जिनमें किसान अपनी समस्याएं और सुझाव दे सकें। संबंधित अधिकारी इन्हें नियमित रूप से चेक करें और प्राप्त सुझावों एवं शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी सहकारी शुगर मिलों के प्रबंध निदेशकों को प्रत्येक चार महीनों में किसानों के साथ बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए, ताकि किसानों की समस्याओं और सुझावों पर सीधे चर्चा हो तथा उपयोगी सुझावों को मिलों की कार्यप्रणाली में शामिल किया जा सके। मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये कि किसानों द्वारा दिये गये वाजिब सुझावों पर त्वरित कार्यवाही की जाये।
*4 फीट की दूरी पर गन्ना बिजाई को मिलेगा बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत बजट घोषणा के अनुरूप 4 फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ना रोपण करने वाले किसानों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 3 हजार रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रति एकड़ की गई है। उन्होंने अधिकारियों को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
*नई और अधिक उत्पादन देने वाली गन्ना किस्में किसानों तक पहुंचे, चार नई टिशू कल्चर लैब होंगी स्थापित*

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत गन्ने की नई और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों को हरियाणा में अपनाने में अनावश्यक देरी न की जाए। प्रदेश में किसी अच्छी वैरायटी के बीज की उपलब्धता कम होने पर दूसरे राज्यों से भी इसकी व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि गन्ने की गुणवत्ता में सुधार से किसानों की उत्पादकता बढ़ने के साथ शुगर मिलों की रिकवरी में भी सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार के बीज पोर्टल पर नई एवं उन्नत किस्मों के बीज का इंडेंट समय पर भेजना सुनिश्चित किया जाए, ताकि अच्छी किस्मों के बीज की अधिक से अधिक उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। प्रदेश में किसी अच्छी किस्म के बीज की उपलब्धता कम होने पर दूसरे राज्यों से भी इसकी व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ने की उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण किस्मों का बीज उपलब्ध करवाने के लिए रोहतक, महम, पानीपत और पलवल करनाल शुगर मिलों में चार टिशू कल्चर लैब स्थापित की जाएंगी। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध होगा तथा गन्ने की उत्पादकता के साथ-साथ शुगर मिलों की रिकवरी में भी सुधार होगा।
*तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करने के लिए पॉलिटेक्निक और आईटीआई से होगा समन्वय*
शुगर मिलों में तकनीकी स्टाफ की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पॉलिटेक्निक कॉलेजों और आईटीआई के माध्यम से आवश्यक तकनीकी स्टाफ उपलब्ध करवाने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। युवाओं को शुगर मिलों की मशीनरी और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने मिल परिसरों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने तथा आवश्यकता के अनुसार उनके सौंदर्गीकरण और बेहतर रखरखाव के भी निर्देश दिए।
*सोनीपत की पुरानी शुगर मिल को शिफ्ट करने पर होगा काम*
मुख्यमंत्री ने सोनीपत की पुरानी शुगर मिल को वर्तमान स्थान से बाहर उपयुक्त स्थान पर शिफ्ट करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई मिल स्थापित होने तक मौजूदा मिल की मशीनरी और अन्य व्यवस्थाओं का उचित रखरखाव करते हुए उसका संचालन सुचारू रखा जाए।
*कैथल में गन्ना हार्वेस्टिंग मशीनों का पायलट प्रोजेक्ट*
गन्ने की कटाई के लिए श्रमिकों की कमी की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कैथल शुगर मिल को हार्वेस्टिंग मशीनें उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। इन मशीनों के माध्यम से किसानों के खेतों में गन्ने की कटाई कर उसे सीधे शुगर मिल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों को श्रमिकों की कमी की समस्या से राहत मिलेगी। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इस व्यवस्था को अन्य शुगर मिल क्षेत्रों में भी बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
*स्टोर मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की सराहना, सभी मिलों में उपयोग होगा अनिवार्य*
मुख्यमंत्री ने शुगर मिलों की मशीनरी की मेंटेनेंस के लिए सेंट्रलाइज्ड टेंडर व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सहकारी शुगर मिलों में स्टोर मैनेजमेंट के लिए स्थापित किए गए सॉफ्टवेयर की सराहना की और निर्देश दिए कि सभी सहकारी शुगर मिलों में इसका उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मिल को आवश्यक स्पेयर पार्ट दूसरी मिल के स्टोर में उपलब्ध है तो संबंधित एमडी आपसी समन्वय से उसका उपयोग करें। इससे नई खरीद में लगने वाला समय और पैसा बचेगा तथा मिलों की स्टॉपेज भी कम होगी।
*फार्मास्यूटिकल सिरप में इस्तेमाल हो सकेगी रोहतक मिल की चीनी*
हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ के प्रबंध निदेशक कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि रोहतक शुगर मिल की चीनी की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। निर्धारित गुणवत्ता हासिल होने पर रोहतक मिल की चीनी का इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा सिरप निर्माण में किया जा सकेगा। हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ के प्रबंध निदेशक कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि रोहतक शुगर मिल की चीनी की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। निर्धारित गुणवत्ता हासिल होने पर रोहतक मिल की चीनी का इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा सिरप निर्माण में किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में पानीपत, रोहतक, करनाल, शाहबाद, गोहाना, सोनीपत, जींद, पलवल, महम और कैथल सहित कुल 10 सहकारी शुगर मिलें हैं, जिनकी कुल पेराई क्षमता 30,650 टीसीडी है। इन मिलों में चीनी के साथ बिजली और एथेनॉल का भी उत्पादन किया जा रहा है।
*ऑफ सीजन में भी बिजली उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी*
मुख्यमंत्री ने ऑफ सीजन में भी शुगर मिलों से बिजली उत्पादन जारी रखने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए। आवश्यकता के अनुसार मिलों की क्षमता बढ़ाने और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मिलों में तैयार गुड़ को हरित एवं वीटा स्टोर के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। वहीं, करनाल और रोहतक शुगर मिलों द्वारा एक किलोग्राम की पैकिंग में रिफाइंड चीनी उपलब्ध करवाने की जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सहकारी शुगर मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ गन्ना किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके लिए मिलों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और किसानों के साथ निरंतर संवाद के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
समीक्षा बैठक के दौरान सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा के अलावा मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजेन्द्रा कुमार, हरियाणा सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज यादव, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव-श्री अजय कुमार, हरियाणा सहकारी समितियों की रजिस्ट्रार डॉ. सुभिता ढाका सहित अन्य अधिकारीगण के साथ-साथ चीनी मिलों के निर्वाचित निदेशकगण व विभिन्न मिलों के गन्ना उत्पादक भी मौजूद थे।






