पहली बारिश में विकास मॉडल बेनकाब, जलभराव और जाम पर सरकार से मांगा श्वेत पत्र व जवाबदेही

गुरुग्राम, 6 अगस्त। संयुक्त किसान मोर्चा, गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने गुरुग्राम में हुई भारी बारिश के बाद पूरे शहर में फैले जलभराव को प्रदेश सरकार और प्रशासन की घोर विफलता करार देते हुए कहा कि पहली ही बारिश ने विकास के तमाम दावों की वास्तविकता जनता के सामने उजागर कर दी है।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, कॉलोनियां और बाजार जलमग्न हैं तथा हजारों परिवार अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। आम नागरिक घंटों तक ट्रैफिक जाम, जलभराव और अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। हरियाणा की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गुरुग्राम की यह स्थिति सरकार के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि दो दिन पहले हुई महज 8 मिमी बारिश ने ही पूरे शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी थी। इतनी कम बारिश में भी गुरुग्राम के अधिकांश हिस्सों में जलभराव और भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। उन्होंने कहा कि हालात इतने गंभीर थे कि मुख्यमंत्री का काफिला भी जलभराव में फंस गया। यदि इतनी कम बारिश में शहर की यह स्थिति है तो शहरी ड्रेनेज व्यवस्था, उसकी योजना और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था, नालों की सफाई और बुनियादी ढांचे के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सारी तैयारियां धराशायी हो जाती हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई का समुचित उपयोग नहीं हो रहा।
संतोख सिंह ने कहा कि गुरुग्राम हरियाणा सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाले जिलों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति चिंताजनक है। जिस जिले से सरकार को सबसे अधिक आय प्राप्त होती है, वहीं के नागरिक हर वर्ष जलभराव, जाम और अव्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्य वास्तव में धरातल पर दिखाई देते, तो गुरुग्राम की जनता को हर मानसून में इस प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। शहर की मौजूदा स्थिति विकास कार्यों में संभावित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग करती है।
चौधरी संतोख सिंह ने सरकार से सवाल किया कि हर वर्ष एक जैसी स्थिति बनने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। उन्होंने जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने तथा विकास कार्यों पर हुए खर्च का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाब और परिणाम चाहती है। यदि गुरुग्राम की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।









