पोर्टलों के जाल में किसानों और आम जनता को उलझा रही सरकार : कुमारी सैलजा

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मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल बंद होने से लाखों एकड़ फसल का पंजीकरण बाकी, खरीद के समय किसानों को हो सकती है परेशानी

तहसीलों से लेकर कृषि योजनाओं तक पोर्टल की तकनीकी बाधाएं बनी परेशानी, नियम सरल और व्यवस्था जवाबदेह बनाए सरकार

चंडीगढ़, 6 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसानों से लेकर आम नागरिकों तक को अलग-अलग पोर्टलों और उनकी जटिल प्रक्रियाओं में उलझाकर रख दिया है। सरकार को तकनीक का इस्तेमाल लोगों की सुविधा के लिए करना चाहिए, लेकिन बार-बार पोर्टल बंद होने, तकनीकी खामियों और जटिल नियमों के कारण यही व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। सरकार को पोर्टल आधारित व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर नियमों को सरल बनाना चाहिए और तकनीकी खराबी के कारण किसी भी नागरिक या किसान को उसके अधिकार अथवा सरकारी सुविधा से वंचित नहीं होने देना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि खरीफ सीजन में मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 67.35 लाख एकड़ में खरीफ की बिजाई हुई है, जबकि अभी तक लगभग 57.56 लाख एकड़ फसल का ब्यौरा ही पोर्टल पर दर्ज हो पाया है। यानी करीब 9.79 लाख एकड़ फसल का ब्यौरा दर्ज होना अभी बाकी है। ऐसे समय में पोर्टल बंद होना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि सरकारी खरीद और कृषि विभाग से जुड़ी कई सुविधाओं के लिए फसल का पंजीकरण आवश्यक है।

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पंजीकरण की अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसानों का सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएं लंबित हैं। यदि तकनीकी कारणों से किसान समय पर अपनी फसल का ब्यौरा दर्ज नहीं करा पाते तो इसका नुकसान किसान को नहीं उठाना चाहिए। सरकार को पंजीकरण की समय सीमा पर्याप्त रूप से बढ़ानी चाहिए और पोर्टल सुचारु होने तक वैकल्पिक ऑफलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध करवानी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि समस्या केवल मेरी फसल-मेरा ब्यौरा तक सीमित नहीं है। तहसीलों और विभिन्न सरकारी विभागों में भी पोर्टल बंद होने या धीमे चलने की शिकायतों के कारण लोगों को रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। डिजिटल व्यवस्था तभी सार्थक है जब वह नागरिकों का समय बचाए। यदि सर्वर या पोर्टल की खराबी के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़े और कई दिनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ें तो सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार लगातार नई सेवाओं को पोर्टल से जोड़ रही है, लेकिन इनके नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में उतनी गंभीरता दिखाई नहीं दे रही। कई बार सामान्य व्यक्ति को आवेदन करने और दस्तावेज अपलोड करने के लिए दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की सीमाएं भी हैं। इसलिए ऑनलाइन व्यवस्था के साथ ऐसी व्यावहारिक वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसी व्यक्ति का काम केवल तकनीकी कारणों से न रुके।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में तकनीक सहायक होनी चाहिए, बाधा नहीं। पोर्टल खराब होने की स्थिति में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और समाधान की समय सीमा निर्धारित की जाए। साथ ही किसानों के फसल पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर प्रत्येक किसान को पर्याप्त अवसर दिया जाए। जिन किसानों का पंजीकरण तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है, उनकी फसल की सरकारी खरीद और अन्य कृषि लाभ प्रभावित नहीं होने चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार को किसानों और आम नागरिकों की वास्तविक परेशानियों को समझते हुए पोर्टलों के नियम सरल करने, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। जनता को सुविधा देना शासन का दायित्व है, उसे पोर्टल और प्रक्रियाओं के बीच भटकाना नहीं।

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Author: Bharat Sarathi

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