हरियाणा के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का हवाला देते हुए गुरुग्राम को अहमदाबाद के साथ सह-मेजबान बनाने की मांग, केंद्र पर पक्षपात का आरोप
रेवाड़ी/गुरुग्राम, 5 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए मांग की है कि वर्ष 2030 में भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन अहमदाबाद के साथ सह-मेजबान के रूप में हरियाणा के गुरुग्राम में भी कराया जाए।
विद्रोही ने कहा कि भारत द्वारा जीते गए कुल 39 पदकों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य सहित 11 पदक जीतकर एक बार फिर साबित किया है कि हरियाणा देश का खेल हब है। उन्होंने रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ के स्वर्ण पदक तथा भिवानी के मुक्केबाजों द्वारा 5 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक जीतने को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भिवानी ने बॉक्सिंग की दुनिया में जो पहचान बनाई है, उसका श्रेय वहां के खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों और खेल प्रबंधन से जुड़े लोगों को भी जाता है।
विद्रोही ने कहा कि यदि कॉमनवेल्थ गेम्स से कुश्ती प्रतियोगिता को बाहर नहीं किया गया होता तो हरियाणा के पहलवान भारत की झोली में कम से कम दस और स्वर्ण पदक डाल सकते थे।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत के लिए सर्वाधिक पदक हरियाणा के खिलाड़ी जीतते हैं, तब केंद्र सरकार प्रदेश को खेल सुविधाओं और खेल अवसंरचना के विकास के लिए अपेक्षित संसाधन और प्राथमिकता क्यों नहीं देती।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि जिस गुजरात का अंतरराष्ट्रीय खेलों में योगदान नगण्य रहा है, वहां 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित करने को प्राथमिकता देना हरियाणा के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अब भी केंद्र सरकार को अपनी नीति में बदलाव करते हुए अहमदाबाद के साथ गुरुग्राम को भी कॉमनवेल्थ गेम्स-2030 का सह-मेजबान घोषित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी से सटा गुरुग्राम आधुनिक खेल अवसंरचना, बेहतर संपर्क व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के कारण कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के लिए उपयुक्त स्थान है। इससे हरियाणा के खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान मिलेगा और प्रदेश में खेलों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।









