हरियाणा में अब लोगों के घर-द्वार तक पहुंचेगी खाद्य जांच सुविधा; मिलावट पर रोक के लिए फिर शुरू होंगी मोबाइल लैब

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राज्य सरकार पांच ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ वैन को करेगी पुनः संचालित, 28 नई मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब भी होंगी शामिल

तीज और रक्षाबंधन से पहले घेवर व फिरनी की जांच तेज

चंडीगढ़, 4 अगस्त – उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हरियाणा सरकार अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच को लोगों के घर-द्वार तक पहुंचाएगी। इसके तहत राज्य में पांच फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल प्रयोगशालाओं को पुनः संचालित किया जाएगा तथा 28 नई मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी (एमएफटीएल) वैन भी शामिल की जाएंगी। इस पहल के तहत आम नागरिक मात्र 20 रुपये प्रति नमूना शुल्क देकर अपने खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक जांच अपने क्षेत्र में ही करवा सकेंगे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को मिलावटी एवं निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों से सुरक्षित रखना तथा राज्य में खाद्य सुरक्षा निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाना है। उन्होंने कहा कि पुनः संचालित की जा रही मोबाइल प्रयोगशालाएं लोगों को उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच कराने की सुविधा देगा, जिससे राज्य की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर जनविश्वास और मजबूत होगा।

उन्होंने बताया कि पंचकूला, करनाल, हिसार, सोनीपत और रेवाड़ी में स्थित पांच फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वैन को व्यापक मरम्मत एवं पुनर्स्थापन के बाद दोबारा संचालित किया जाएगा। ये वाहन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की योजना के तहत उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन समय के साथ यांत्रिक खराबी तथा प्रयोगशाला उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने के कारण निष्क्रिय हो गए थे।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि ये मोबाइल प्रयोगशालाएं निरीक्षण, त्योहारों, बाजारों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, मेलों तथा विशेष प्रवर्तन अभियानों के दौरान मौके पर ही खाद्य नमूनों की जांच करने में सक्षम होंगी। इसके अलावा नागरिक भी बिना किसी स्थायी प्रयोगशाला में जाए अपने क्षेत्र में ही सामान्य खाद्य पदार्थों की जांच करवा सकेंगे, जिससे खाद्य सुरक्षा सेवाएं अधिक सुलभ बनेंगी।

उन्होंने बताया कि पुनर्स्थापना परियोजना के तहत वाहनों के साथ-साथ उनके भीतर स्थापित आधुनिक प्रयोगशाला ढांचे का भी पूर्ण नवीनीकरण किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक परीक्षण उपकरण, कार्यस्थल, प्लंबिंग, विद्युत प्रणाली तथा वाहन के अन्य आवश्यक पुर्जों का उन्नयन शामिल होगा। इस परियोजना पर लगभग 33.79 लाख रुपये की लागत आएगी।

खाद्य सुरक्षा निगरानी को और अधिक मजबूत करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए 28 नई मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी (एमएफटीएल) वैन खरीदने की अंतिम प्रक्रिया में है। इन वैन की खरीद हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड (एचएमएससीएल) के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) की वित्तीय सहायता से की जा रही है। इनके संचालन शुरू होने के बाद पूरे क्षेत्र में घर-द्वार तक खाद्य जांच सेवाओं का व्यापक विस्तार होगा।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि मोबाइल परीक्षण नेटवर्क के विस्तार से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूती मिलेगी। साथ ही उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी तथा खाद्य कारोबार संचालकों को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

इस बीच, तीज और रक्षाबंधन के त्योहारों को देखते हुए हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने घेवर और फिरनी में मिलावट रोकने के लिए विशेष अभियान तेज कर दिया है।

16 जुलाई से 2 अगस्त के बीच राज्यभर से घेवर और फिरनी के 122 नमूने एकत्र किए गए। अब तक जांचे गए 18 नमूनों में से 15 नमूने निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाए गए हैं, जबकि तीन नमूने मानकों के अनुरूप नहीं मिले हैं। शेष नमूनों की प्रयोगशाला में जांच जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि देसी घी से तैयार होने का दावा करने वाले चुनिंदा नमूनों को एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा गया है, ताकि वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से इन दावों की पुष्टि की जा सके और उपभोक्ताओं को भ्रामक ब्रांडिंग से बचाया जा सके।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार की यह रणनीति घर-द्वार पर वैज्ञानिक जांच, सशक्त प्रवर्तन और उपभोक्ता जागरूकता इन तीनों पहलुओं पर आधारित है, जिससे सुरक्षित खाद्य व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और लोग अधिक जागरूक होकर सही खाद्य विकल्प चुन सकेंगे।

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Author: Bharat Sarathi

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