• कॉमनवेल्थ खेल 2030 हरियाणा में हो की मांग के साथ कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, जय प्रकाश जेपी, वरुण चौधरी, सतपाल ब्रह्मचारी, कर्मवीर बौद्ध ने संसद परिसर में किया प्रदर्शन
• मेडल हरियाणा देता है, कॉमनवेल्थ खेल 2030 गुजरात में क्यों?
• कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले हरियाणा की उपेक्षा करना महापाप है – दीपेन्द्र हुड्डा• हरियाणा की उपेक्षा देश को महंगी पड़ेगी – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 3 अगस्त। आज संसद परिसर में कॉमनवेल्थ खेल 2030 के लिए हरियाणा को मेजबान या सह-मेजबान राज्य बनाने की मांग को लेकर हरियाणा के कांग्रेस सांसदों – सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, सांसद जयप्रकाश जेपी, सांसद वरुण मुलाना, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और सांसद कर्मबीर बौद्ध ने प्रदर्शन किया। सभी सांसदों ने देश का नाम रोशन करने पर कॉमनवेल्थ खेलों के सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि CWG 2026 में भारत के 13 गोल्ड मेडल में से 7 गोल्ड मेडल अकेले हरियाणा से आए हैं। इसलिए हमारी मांग है कि 2030 कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी हरियाणा में की जाए या सह-मेजबान प्रदेश बनाया जाए। संसद में हम अब तक सरकार से यही अपील कर रहे थे कि यदि भारत को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी का अवसर मिलता है, तो हरियाणा को भी इसमें शामिल किया जाए। पूर्ण मेजबान न सही, तो कम से कम सह-मेजबान प्रदेश अवश्य बनाया जाए। लेकिन खेल मंत्रालय द्वारा जब यह औपचारिक घोषणा कर दी गई है कि ये आयोजन केवल एक ही शहर अहमदाबाद (गुजरात) में होंगे, तो सरकार ने हमारी इस अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। साथ ही 2036 ओलंपिक की बिड भी केवल अहमदाबाद के लिए पेश की जा रही है।यह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है और अब हम अपने इस हक के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि 2% आबादी वाले हरियाणा के खिलाड़ी देश को कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में 50% से अधिक मेडल दिलाते हों, फिर भी हरियाणा सरकार की उपेक्षा का शिकार क्यों है? इससे भी दुर्भाग्यपूर्ण ये है कि हरियाणा सरकार ने इसकी मेजबानी या सह-मेजबानी के लिए कोई प्रस्ताव भी नहीं भेजा। दीपेन्द्र हुड्डा ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद में क्यों जहां एक भी मेडल नहीं हैं? जब भारत को कॉमनवेल्थ खेल 2030 की मेज़बानी का मौका मिला, तो इसके लिए गुजरात को चुना गया क्योंकि हरियाणा की बीजेपी सरकार प्रदेश के हक की आवाज तक नहीं उठा सकी। कॉमनवेल्थ खेल 2030 के लिए लाखों करोड़ का निवेश अब अहमदाबाद में होगा, खेल का ढांचा तैयार होगा। अगर हरियाणा को-होस्ट बनाया जाता है तो यही खेल का ढांचा, स्टेडियम और डेवलपमेंट पर लाखों करोड़ खर्च हरियाणा में भी होता। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेज़बानी अथवा सह मेज़बानी के लिए हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव करे और भारत सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे।
उन्होंने आगे कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले हरियाणा की उपेक्षा करना महापाप है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने ओलंपिक 2036 को भी गुजरात में कराने के लिए आधिकारिक बोली (बिडिंग) पेश करने की घोषणा की है। वहाँ भी हरियाणा की आवाज नहीं रखी गई। हरियाणा की उपेक्षा देश को महंगी पड़ेगी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का आयोजन हरियाणा में होना चाहिए या तो देश की राजधानी दिल्ली में हो। हरियाणा के जो जिले NCR में आते हैं उसमें आयोजन हो सकता है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि 1952 में दिल्ली में, 1982 में दिल्ली में एशियन गेम्स का आयोजन हुआ था। 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स दिल्ली में हुआ, जिसमें भारत को 37 गोल्ड मेडल मिले। उस समय भी 22 गोल्ड अकेले हरियाणा के थे। यहाँ तक कि कॉमनवेल्थ खेलों के जन्मदाता इंग्लैंड से भी भारत के मेडल ज्यादा थे।
सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि आज हरियाणा में खेल ढाँचे की इतनी दुर्दशा है कि खेल के मैदान में प्रैक्टिस करते हुए हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही है। हरियाणा को खेलो इंडिया बजट में सबसे कम बजट दिया गया। देश के ₹3500 करोड़ के ‘खेलो इंडिया’ बजट में ₹600 करोड़ गुजरात को और सबसे ज्यादा मेडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ ₹80 करोड़ ही दिए गए, जो देश में सबसे कम है। जबकि, ओलंपिक, एशियाई, कॉमनवेल्थ खेल हों, सबसे ज्यादा मेडल हरियाणा के खिलाड़ी लाते हैं फिर भी उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया। पिछले 4 ओलंपिक में देश को मिले कुल मेडल में से आधे से ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। पिछले ओलंपिक में करीब 25 प्रतिशत खिलाड़ी हरियाणा से थे। हमें गर्व है कि 2006 के बाद से ओलंपिक समेत जितने भी खेल हुए उनमें 50 प्रतिशत मेडल और 25 प्रतिशत खिलाड़ियों का हिस्सा हरियाणा का है।
सरकार हरियाणा के लिए खेलो इंडिया में न के बराबर बजट दे रही है। यह देश की खेल भावना के साथ क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण अंचलों में खेल स्टेडियम बनाये थे, खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस की हुड्डा सरकार द्वारा बनाई गई ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति और स्कूल स्तर पर कक्षा पहली से खेल-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए SPAT नीति को भी बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही खत्म कर दिया। इतना ही नहीं, बीजेपी सरकार हरियाणा में कांग्रेस सरकार के समय बने 481 खेल स्टेडियमों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट तक नहीं दे पाई। 11 साल में नया स्टेडियम बनाना तो दूर, मौजूदा स्टेडियमों का रिपेयर तक नहीं कराया, खेल नर्सरियों की दुर्दशा कर डाली। जिसके चलते हाल ही में 2 होनहार खिलाड़ियों को जान तक गँवानी पड़ी।








