सुरजेवाला ने भाजपा सरकार से की माँग; पराली के बहाने किसानों की जमीन पर ‘रेड एंट्री’ का काला फरमान वापस लो
चंडीगढ़, 20 सितंबर 2026 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार, हरियाणा सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के नए ड्राफ्ट नियमों के जरिए भाजपा अब पराली जलाने के बहाने किसानों की जमीन को ही “रेड एंट्री” में डालकर खेती-किसानी को ठिकाने लगाने का काला कानून लेकर आई है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि यह नया प्रावधान हरियाणा, पंजाब, दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में लागू होगा। नियमों के अनुसार पराली जलाने वाले किसान की भूमि रिकॉर्ड (खसरा-गिरदावरी, जमाबंदी) में 15 महीने तक की रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। अगर दोबारा घटना होती है या जुर्माना नहीं भरा जाता तो यह अवधि और 15 महीने बढ़ाई जा सकती है। यानी कुल 30 महीने तक किसान की जमीन “दागी” घोषित की जा सकती है।
उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि रेड एंट्री सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगी। इससे किसान को सरकारी योजनाओं से बाहर किया जा सकता है, एमएसपी पर फसल खरीद से बेदखल किया जा सकता है, खाद-बीज की सब्सिडी छीनी जा सकती है, किसान क्रेडिट कार्ड या कृषि ऋण से वंचित किया जा सकता है और जमीन के लेन-देन या गिरवी रखने पर भी पाबंदी लग सकती है। साथ ही एफआईआर और ₹30,000 तक जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है।
रणदीप सुरजेवाला ने सवाल उठाते हुए कहा कि देश और प्रदेश का अन्नदाता किसान अपनी सारी मेहनत, लागत और समय लगाकर सबका पेट भरने के लिए अनाज उपजाता है। वह कोई माइनिंग या संसाधनों की लूट नहीं करता। फिर उसके साथ अपराधियों जैसा सलूक क्यों? उन्होंने कहा कि तीन काले कृषि कानून थोपकर सैकड़ों किसानों की जान लेने के बाद भी अपनी बदनीयती को अंजाम तक पहुंचाने में नाकाम रही भाजपा अब पराली की आड़ में चोर दरवाजे से यह नया काला कानून लाकर खेती-किसानी का गला घोंटना चाहती है। 30 महीने तक जमीन की “सीलबंदी” करके किसान का सब कुछ छीन लिया जा सकता है और इसे बार-बार दोहराकर हमेशा के लिए बर्बाद भी किया जा सकता है।
सुरजेवाला ने पूछा कि क्या भाजपा की असली साजिश पहले फसल लूटना, हकमारी करना और फिर आखिर में जमीन हथियाने की है? क्या मोदी सरकार चाहती है कि दिल्ली के आसपास खेती बंद हो, किसान जमीन बिल्डरों को बेचें और आगे बढ़ जाएं?
हरियाणा का जिक्र करते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अगर सच में पराली जलाने और प्रदूषण रोकने का इरादा होता तो सरकार समाधान और सहूलियत पर जोर देती। किसानों को हैप्पी सीडर अपनाने के लिए कहा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह कारगर नहीं है। छोटे और मझोले किसानों के पास 10-15 लाख रुपये की मशीन और उच्च क्षमता वाले ट्रैक्टर का इंतजाम कहां से हो? हरियाणा में करीब 70 प्रतिशत छोटे-मध्यम किसानों के पास 45-50 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर हैं, जबकि हैप्पी सीडर के लिए 50 हॉर्स पावर से अधिक क्षमता वाले महंगे ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है। कुल लागत 15-20 लाख रुपये तक बैठती है। क्या भाजपा सरकार के पास किसानों के लिए ठोस सब्सिडी प्लान है या सिर्फ लूट की दुकान?
उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार सामूहिक या सहकारी प्रबंधन के जरिए सुपर सीडर मशीनों का व्यापक इंतजाम करे और इसकी लागत खुद वहन करे। किसानों की मुसीबतें कम करना भाजपा की नीयत में नहीं है। उल्टा नई-नई मुसीबतें लादकर हकमारी और लूटमारी करना ही अब उनकी आदत बन चुकी है।
सांसद रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को चेतावनी दी कि हरियाणा प्रदेश और देश देख रहा है। जैसे तीन काले कृषि कानून भाजपा को वापस लेने पड़े, वैसे ही किसानों के खेत को रेड एंट्री में धकेलने वाला यह बुलडोजर कानून भी भाजपा के डबल इंजन को वापस लेना होगा।








