1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी मध्यस्थता अभियान
समझौतायोग्य मामलों की पहचान कर सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान को मिलेगा बढ़ावा
गुरुग्राम, 1 अगस्त- मेडिएशन एंड कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (एमसीपीसी) के अध्यक्ष एवं न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के मार्गदर्शन में “मेडिएशन फॉर नेशन 3.0” अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत आयोजित किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम द्वारा इस राष्ट्रव्यापी अभियान का संचालन किया जाएगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम नरेंद्र सुरा के मार्गदर्शन तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम निशा के निर्देशन में अभियान से संबंधित कार्य किए जाएंगे। अभियान के तहत ऐसे लंबित मामलों की पहचान की जाएगी, जिनमें आपसी समझौते की संभावना है और जिन्हें मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जा सकता है। यह अभियान 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार 1 अगस्त से 30 सितंबर, 2026 तक लंबित मामलों की पहचान, प्री-मेडिएशन स्क्रीनिंग, पक्षकारों को सूचना एवं नोटिस जारी करना, उपयुक्त मामलों को मध्यस्थता केंद्रों में भेजना, जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, चयनित मामलों की सूची का प्रकाशन तथा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद चयनित मामलों का विवरण 30 सितंबर, 2026 तक मेडिएशन एंड कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (एमसीपीसी) को भेजा जाएगा तथा 1 अक्टूबर से “मेडिएशन फॉर नेशन 3.0” अभियान का औपचारिक शुभारंभ होगा।
इस अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा मामले, चेक बाउंस प्रकरण, समझौतायोग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली एवं सारफेसी (SARFAESI) मामले, निष्पादन वाद, मध्यस्थता एवं वाणिज्यिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, बंटवारा वाद, बेदखली वाद, भूमि अधिग्रहण मामले, श्रम विवाद तथा अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पक्षकारों को मध्यस्थता की सुविधा सरल एवं सुलभ रूप से उपलब्ध हो। पक्षकारों की सुविधा के अनुसार मध्यस्थता ऑफलाइन, ऑनलाइन अथवा हाइब्रिड माध्यम से आयोजित की जा सकेगी। आवश्यकता के अनुसार सप्ताह के सभी सातों दिन मध्यस्थता सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम नरेंद्र सुरा ने कहा कि मध्यस्थता एक सरल, त्वरित, कम खर्चीली तथा प्रभावी विवाद समाधान प्रणाली है, जो न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करती है, बल्कि पक्षकारों के आपसी संबंधों को भी बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम निशा ने अधिवक्ताओं एवं आम जन से अपील की कि वे “मेडिएशन फॉर नेशन 3.0” अभियान में सक्रिय सहभागिता करें तथा विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता को प्राथमिकता दें। उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम द्वारा व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे तथा सभी संबंधित विभागों एवं हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।








