स्थानीय लोगों का आरोप—बिना स्वीकृति शुरू हुआ निर्माण, ग्रीन बेल्ट को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग
गुरुग्राम, 1 अगस्त। सेक्टर-5 की ग्रीन बेल्ट में प्रस्तावित सार्वजनिक शौचालय के निर्माण को लेकर स्थानीय निवासियों का विरोध एक बार फिर मुखर हो गया है। क्षेत्र के रेजिडेंट्स ने ग्रीन बेल्ट में बने अवैध निर्माण के ढांचे को तत्काल हटाकर हरित क्षेत्र को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं करते, लेकिन सार्वजनिक हरित क्षेत्र में नियमों के विपरीत निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सेक्टर-3, 5 एवं 6 दिनेश वशिष्ठ ने बताया कि स्थानीय निवासियों ने प्रारंभ से ही ग्रीन बेल्ट में शौचालय निर्माण का विरोध किया था। इसके बावजूद वार्ड-35 के पार्षद परमिंदर कटारिया द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराया गया। उन्होंने कहा कि रेजिडेंट्स की ओर से संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी से विभागीय स्वीकृति और स्वीकृत नक्शे की प्रति मांगी गई, लेकिन कोई वैध अनुमति या स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद संबंधित विभाग को लिखित शिकायत दी गई, जिसके उपरांत निर्माण कार्य रोक दिया गया।
स्थानीय निवासी मदन गोपाल यादव ने कहा कि ग्रीन बेल्ट सार्वजनिक हरित क्षेत्र है और यहां पेड़ों की कटाई कर निर्माण करना स्थानीय लोगों की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि अवैध निर्माण के ढांचे को हटाकर ग्रीन बेल्ट को पहले की स्थिति में बहाल किया जाए।
नवतरंग एनजीओ की चेयरपर्सन रितु चौधरी ने कहा कि उनका संगठन विकास कार्यों का विरोध नहीं करता, लेकिन सभी निर्माण कार्य नियमानुसार और निर्धारित स्थान पर ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं हरियाली बढ़ाने और वृक्षारोपण को प्रोत्साहित कर रही है, तब ग्रीन बेल्ट में पेड़ों की कटाई कर निर्माण कराना चिंताजनक है।
भाजपा नेत्री अनीता लूथरा अग्रवाल ने कहा कि सेक्टर-5 मार्केट में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए पहले से निर्धारित स्थान उपलब्ध है। ऐसे में शौचालय का निर्माण वहीं कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के समर्थक हैं, लेकिन विकास कार्य नियमों और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए किए जाने चाहिए।
रेजिडेंट्स ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर ग्रीन बेल्ट में बने निर्माण के ढांचे को हटाया जाए तथा भविष्य में सार्वजनिक हरित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण करने से पहले नियमानुसार स्वीकृति और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों पर भी विचार किया जाए।








