लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम (LADCS) को हटा कर पुरानी पैनल व्यवस्था लागू की जाए-चौधरी संतोख सिंह

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मौजूदा लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम (LADCS) युवा अधिवक्ताओं के हितों के ख़िलाफ़ है

जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम ने ‘नो वर्क डे’ मनाकर जताया विरोध

गुरुग्राम। जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम के पूर्व प्रधान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि मौजूदा लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम (LADCS) युवा अधिवक्ताओं के हितों के ख़िलाफ़ है। पूर्व में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बार एसोसिएशन के माध्यम से अधिवक्ताओं का पैनल तैयार कर जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराता था। वर्तमान लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम (LADCS) के लागू होने के बाद वेतनभोगी डिफेंस काउंसल नियुक्त किए जा रहे हैं, जिससे वर्षों से चली आ रही पैनल आधारित व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई है।

उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव युवा अधिवक्ताओं पर पड़ा है। कानूनी सहायता से जुड़े अधिकांश आपराधिक मुकदमे सीमित संख्या में LADCS अधिवक्ताओं को दिए जाने के कारण स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर रहे नए अधिवक्ताओं के लिए कार्य के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इस व्यवस्था में बार एसोसिएशनों की भूमिका और भागीदारी भी पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है, जिससे स्वतंत्र बार व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं की मांग है कि वर्तमान LADCS नीति को वापस लिया जाए अथवा इसमें आवश्यक संशोधन कर पूर्व की पैनल आधारित व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए। साथ ही, इस नीति की व्यापक समीक्षा कर बार एसोसिएशनों एवं अधिवक्ताओं के सुझावों को भी शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक पैनल एडवोकेट प्रणाली ने दशकों से प्रभावी ढंग से कानूनी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अधिवक्ताओं के बीच कार्य का संतुलित एवं समान वितरण सुनिश्चित किया है। कानूनी सहायता व्यवस्था को इस प्रकार मजबूत किया जाना चाहिए कि वह स्वतंत्र बार का सहयोग करे, न कि उसकी भूमिका को प्रतिस्थापित करे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं का विरोध मुफ्त कानूनी सहायता (Legal Aid) के सिद्धांत से नहीं, बल्कि Legal Aid Defence Counsel System (LADCS) के वर्तमान स्वरूप एवं उसके क्रियान्वयन के तरीके से है। उनका उद्देश्य कानूनी सहायता का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि न्याय तक पहुंच को सुदृढ़ करते हुए बार की स्वतंत्रता, अधिवक्ताओं की आजीविका तथा उनके पेशेवर विकास से कोई समझौता न हो।

पंजाब एवं हरियाणा बार एसोसिएशनों की संयुक्त कार्यवाही समिति (Joint Action Committee) के आह्वान पर जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम ने वर्तमान LADCS नीति के विरोध में ‘नो वर्क डे’ मनाया। इस दौरान जिला न्यायालय गुरुग्राम के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया। पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ के विभिन्न बार एसोसिएशनों ने भी इसी क्रम में ‘नो वर्क डे’ मनाकर न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया।

कार्य बहिष्कार के दौरान जिला न्यायालय परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में LADCS नीति के विरोध में अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार तथा संबंधित प्राधिकरणों से अधिवक्ताओं की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

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Author: Bharat Sarathi

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