सिरसा/नई दिल्ली,27 जुलाई। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने देश के विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों के दौरान कथित बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और मुकदमों की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ को सुनना सरकार का दायित्व है, न कि उसे बलपूर्वक दबाना।
सांसद ने कहा कि यदि युवा अपने भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे हैं, तो उनके साथ संवाद किया जाना चाहिए।कुमारी सैलजा ने कहा कि बिहार सहित विभिन्न राज्यों से छात्रों पर बल प्रयोग, बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारियों की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे अत्यंत चिंताजनक हैं। यदि कहीं भी कानून का उल्लंघन हुआ है या अत्यधिक बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति को अपराध नहीं माना जा सकता।
कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले छात्रों के साथ न्याय और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां उस आश्वासन के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहीं। सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर विश्वास बहाली और संवाद की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है। यदि विपक्ष छात्रों के मुद्दों को संसद में उठा रहा है, तो सरकार को उसका जवाब तथ्यों और संवेदनशीलता के साथ देना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती संवाद,जवाबदेही और पारदर्शिता से होती है, दमन और टकराव से नहीं। सांसद ने मांग की कि छात्रों के विरुद्ध दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, कथित हिंसा की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा युवाओं के विश्वास को बहाल करने के लिए सरकार प्रभावी कदम उठाए। कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से अधिक महत्वपूर्ण है और उनकी आवाज़ का सम्मान किया जाना चाहिए।









