कहा- गंदे पानी, जलभराव और अव्यवस्था से जूझ रहा प्रदेश का ऐतिहासिक कॉलेज, कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र करेंगे लोकतांत्रिक संघर्ष

गुरुग्राम। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पटौदी विधानसभा चुनाव 2024 की कांग्रेस प्रत्याशी पर्ल चौधरी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक खुला पत्र लिखकर गुरुग्राम जिले के सबसे पुराने सहशिक्षा राजकीय महाविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय जटौली हेलीमंडी, की बदहाल स्थिति पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि 15 अगस्त 2026 से पहले महाविद्यालय की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा छात्र-छात्राएं लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने को विवश होंगे।
पर्ल चौधरी ने पत्र में कहा कि वर्ष 1970 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक महाविद्यालय ने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित कर समाज को जिम्मेदार नागरिक दिए हैं, लेकिन आज इसका लगभग 90 प्रतिशत परिसर सीवेज के गंदे और बदबूदार पानी के जलभराव की चपेट में है। उन्होंने कहा कि जिस परिसर में शिक्षा और ज्ञान का वातावरण होना चाहिए, वहां बदबू, बीमारी और अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जटौली गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग वर्षों से प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और सांसदों के समक्ष इस समस्या को उठा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि संभवतः इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी शिकायतें पहुंची होंगी, लेकिन वे फाइलों में दबकर रह गईं।
पर्ल चौधरी ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और अब सरकार के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 15 अगस्त तक महाविद्यालय की स्थिति नहीं सुधरी तो छात्र अपने भविष्य की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष करेंगे और वह स्वयं भी उनके साथ खड़ी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय के पूर्व छात्र भी अपने संस्थान का ऋण चुकाने के लिए इस अभियान में शामिल होंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वह सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) के माध्यम से प्रतिदिन इस मुद्दे की याद दिलाएंगी ताकि शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां इस गंभीर समस्या पर कार्रवाई करें।
‘नशे के विरुद्ध युद्ध’ अभियान पर भी उठाया सवाल

पर्ल चौधरी ने मुख्यमंत्री के “नशे के विरुद्ध एक युद्ध” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विडंबना है कि जिस परिसर में शिक्षा की पौध फलनी-फूलनी चाहिए, वहां जलभराव के बीच भांग के पौधे उग रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि महाविद्यालय के रखरखाव का ठेका किसी एजेंसी को दिया गया है तो उसकी भूमिका और भुगतान की भी जांच कराई जाए।
आठ सूत्रीय मांगें रखीं
पर्ल चौधरी ने मुख्यमंत्री के समक्ष आठ प्रमुख मांगें रखीं—
- महाविद्यालय परिसर में फैले एसटीपी के गंदे पानी को तत्काल पूरी तरह हटाया जाए।
- गंदे पानी से नष्ट हुए पेड़ों का पुनरोद्धार किया जाए तथा परिसर में उगी भांग एवं अन्य अवांछित वनस्पतियों को हटाया जाए।
- महाविद्यालय के समीप स्थित एसटीपी को चरणबद्ध योजना के तहत स्थानांतरित किया जाए और भविष्य में उसका पानी कॉलेज परिसर में न पहुंचे।
- कॉमर्स ब्लॉक सहित जलभराव से क्षतिग्रस्त सभी भवनों की समयबद्ध मरम्मत एवं रखरखाव योजना घोषित की जाए।
- छात्र-छात्राओं और महिला स्टाफ के लिए पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था की जाए तथा नई इमारत के स्टाफ टॉयलेट में दरवाजे और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- मां सरस्वती की प्रतिमा को सीवेज के पानी से सुरक्षित रखने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
- शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती कर शिक्षण व्यवस्था मजबूत की जाए।
- महाविद्यालय के सरकारी वेबपेज और शिक्षा विभाग के पोर्टल पर स्थापना वर्ष की विसंगति दूर कर सही जानकारी दर्ज की जाए।
“यह केवल कॉलेज नहीं, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का प्रश्न”
पर्ल चौधरी ने कहा कि यह मामला केवल एक महाविद्यालय का नहीं, बल्कि पटौदी विधानसभा क्षेत्र और आसपास के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सरकार इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की गरिमा बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।








