बाजरे की सरकारी खरीद में देरी से किसानों को ₹700-800 प्रति क्विंटल का नुकसान : विद्रोही

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₹2900 एमएसपी के मुकाबले मंडियों में ₹2000 से ₹2300 तक बिक रही उपज; तत्काल खरीद शुरू करने की मांग

रेवाड़ी, 17 सितम्बर 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि बाजरे की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू नहीं करके हरियाणा की भाजपा सरकार किसानों को व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर कर रही है।

विद्रोही ने कहा कि बाजरा मंडियों में पहुंचना शुरू हो चुका है, लेकिन सरकारी खरीद को लेकर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है। बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2900 प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि किसानों को मजबूरी में अपनी उपज ₹2000 से ₹2300 प्रति क्विंटल तक बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल ₹700 से ₹900 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अहीरवाल एवं दक्षिणी हरियाणा के किसान कई बार सरकार से 20 सितम्बर से बाजरे की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकार यह बताने को तैयार नहीं है कि खरीद कब शुरू होगी और बाजरा सीधे एमएसपी पर खरीदा जाएगा अथवा भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को भुगतान किया जाएगा।

‘अस्पष्टता का लाभ व्यापारियों को’

विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद पर स्थिति स्पष्ट नहीं करके सरकार जानबूझकर व्यापारियों को किसानों की उपज मनमाने भाव पर खरीदने का अवसर दे रही है। एक तरफ भाजपा सरकार सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा करती है, वहीं धरातल पर चार-पांच फसलों से अधिक की प्रभावी खरीद नहीं हो रही।

उन्होंने कहा कि भावांतर भरपाई योजना के नाम पर भी किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा। अहीरवाल के किसानों को प्रत्येक वर्ष बाजरा और सरसों की खरीद के समय ऐसी ही अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। सरकारी खरीद शुरू होने तक किसान अपनी बड़ी मात्रा में उपज कम दामों पर बेच चुके होते हैं।

‘कुछ दिन खरीद कर बंद कर देती है सरकार’

विद्रोही के अनुसार, बची हुई फसल में से भी बहुत कम मात्रा एमएसपी अथवा भावांतर योजना के अंतर्गत खरीदी जाती है और कुछ समय बाद सरकारी खरीद बंद कर दी जाती है। हरियाणा में एमएसपी पर फसल खरीदने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।

उन्होंने भाजपा सरकार के रवैये को किसान विरोधी बताते हुए मांग की कि बाजरे की सरकारी खरीद तत्काल एमएसपी पर शुरू की जाए। इसके साथ ही खरीद की अवधि, मात्रा, मंडियों और भुगतान प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि व्यापारियों द्वारा किसानों की मजबूरी का लाभ उठाकर उनकी फसल कम भाव में न खरीदी जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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