बावल का ‘खेती बचाओ’ सम्मेलन बना भाजपा की गुटबाजी का आईना: विद्रोही

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राव इन्द्रजीत सिंह की अनुपस्थिति और समर्थक विधायकों की दूरी पर उठे सवाल, सत्ता वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आने का लगाया आरोप

वेदप्रकाश विद्रोही

रेवाड़ी, 1 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मंगलवार को हिसार कृषि विश्वविद्यालय के शुष्क कृषि अनुसंधान केंद्र बावल में आयोजित ‘खेती बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय समापन समारोह को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम किसानों के बजाय भाजपा की आंतरिक गुटबाजी और सत्ता वर्चस्व की लड़ाई का मंच बनकर रह गया। विद्रोही का दावा है कि कार्यक्रम में स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह की अनुपस्थिति तथा उनके समर्थक तीनों भाजपा विधायकों और अधिकांश पदाधिकारियों का दूरी बनाए रखना भाजपा के भीतर गहराते मतभेदों का स्पष्ट संकेत है।

विद्रोही ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम अपेक्षित जनसमर्थन जुटाने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की भागीदारी नगण्य रही और पूरा आयोजन सरकारी कर्मचारियों तक सीमित होकर रह गया। उनके अनुसार, आयोजन स्थल पर किसानों और आम जनता की कमी साफ दिखाई दे रही थी, जिससे आयोजकों में भी बेचैनी और घबराहट नजर आई। यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी वाला कार्यक्रम लगभग 45 मिनट में ही समाप्त करना पड़ा।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि राव इन्द्रजीत सिंह खेमे के कथित अघोषित बहिष्कार के बाद प्रशासन और पुलिस भी अत्यधिक सतर्क एवं दबाव में दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि जो किसान कार्यक्रम में पहुंचे, उनकी कड़ी तलाशी ली गई और कई किसानों ने शिकायत की कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसानों के कार्यक्रम में इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता क्यों पड़ी।

उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल भी खड़े किए। विद्रोही ने कहा कि क्या यह सब केवल संयोग था, या फिर भाजपा के भीतर सत्ता संतुलन और वर्चस्व की लड़ाई का सुनियोजित प्रदर्शन? क्या केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच शक्ति प्रदर्शन का यह एक राजनीतिक संदेश था? उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री को औपचारिक निमंत्रण दिए जाने के बावजूद वे अंतिम समय में कार्यक्रम से दूर रहे और उनके साथ पूरे संगठन का बड़ा हिस्सा भी अनुपस्थित रहा, तो यह सामान्य राजनीतिक घटना नहीं मानी जा सकती।

विद्रोही ने विशेष रूप से इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि बावल के स्थानीय भाजपा विधायक की गैरमौजूदगी ने भी कई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति में यह घटनाक्रम भविष्य के बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। यदि भविष्य में 75 वर्ष की आयु पार कर चुके राव इन्द्रजीत सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किया जाता है, तो अहीरवाल की राजनीति में व्यापक उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि बावल का यह घटनाक्रम कहीं उसी संभावित राजनीतिक बदलाव की प्रस्तावना तो नहीं है।

विद्रोही ने कहा कि भाजपा लंबे समय से कांग्रेस की गुटबाजी पर निशाना साधती रही है, लेकिन अब वही स्थिति भाजपा के भीतर भी दिखाई देने लगी है। सत्ता, संगठन और क्षेत्रीय नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राव इन्द्रजीत सिंह और उनके समर्थकों की अनुपस्थिति को लेकर जो आधिकारिक कारण बताए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से अधिक राजनीतिक बहानेबाजी प्रतीत होते हैं।

उन्होंने कहा कि फिलहाल यह घटनाक्रम कई राजनीतिक सवाल छोड़ गया है। आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व इस स्थिति से कैसे निपटता है और इसका अहीरवाल तथा हरियाणा की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। बावल का यह सम्मेलन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि उसने भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संघर्ष की चर्चा को भी सार्वजनिक रूप से हवा दे दी है।

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Author: Bharat Sarathi

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