रेवाडी, 30 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच यमुना जल को लेकर हुए एमओयू पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अहीरवाल और दक्षिणी हरियाणा के लोगों के साथ विश्वासघात बताया है।
विद्रोही ने कहा कि जुलाई से अक्टूबर तक हथिनी कुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से पाइपलाइन द्वारा राजस्थान को 580 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी देने का निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और चरखी दादरी जैसे दक्षिणी हरियाणा के जिले वर्षों से नहरी और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। उनका कहना था कि इन जिलों को आज तक यह कहकर टाल दिया गया कि सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद के समाधान के बाद रावी-ब्यास का पानी उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन पिछले 59 वर्षों से यह केवल आश्वासन बनकर रह गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार ने यमुना के अतिरिक्त पानी का उपयोग दक्षिणी हरियाणा की प्यास बुझाने और लगातार गिरते भू-जल स्तर को सुधारने के बजाय राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं और ऐसे में 3.6 मीटर से अधिक व्यास की भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर हर वर्ष राजस्थान को पानी उपलब्ध कराना क्षेत्र की जनता के जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर राजस्थान को अतिरिक्त बाढ़ का पानी देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा एमओयू पर हस्ताक्षर करना दक्षिणी हरियाणा के हितों के विपरीत है। विद्रोही ने याद दिलाया कि 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा हुए यमुना जल समझौते का उस समय भाजपा, जनता दल, हरियाणा विकास पार्टी और वाम दलों ने मिलकर विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि उस समय वह स्वयं जनता दल की ओर से समझौते का विरोध करने वाली समिति के सदस्य थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस समझौते को भाजपा ने 1994 में हरियाणा विरोधी बताया था, उसी का हवाला देकर 32 वर्ष बाद राजस्थान के साथ एमओयू करना क्या दक्षिणी हरियाणा के साथ धोखाधड़ी नहीं है।
विद्रोही ने मांग की कि यदि राज्य सरकार वास्तव में अहीरवाल और दक्षिणी हरियाणा के हितों के प्रति गंभीर है तो हथिनी कुंड बैराज से बरसात के अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के माध्यम से अहीरवाल क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना बनाई जाए। इससे एक ओर क्षेत्र की पेयजल समस्या का समाधान होगा और दूसरी ओर लगातार गिर रहे भू-जल स्तर को रिचार्ज कर भविष्य के जल संकट से भी राहत मिल सकेगी।








