“बैरिकेडिंग पर निगम की सख्ती, लेकिन अपने ही विकास कार्यों में नियमों का क्या हाल?”

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

निर्माण स्थलों पर सख्ती के आदेश, सरकारी एजेंसियों की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

“जनता को नियमों का पाठ, खुद कितना पालन करता है नगर निगम?”

गुरुग्राम, 24 जून। नगर निगम गुरुग्राम ने धूल प्रदूषण पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण, तोड़फोड़ और खुदाई स्थलों पर जीआई शीट बैरिकेडिंग अनिवार्य कर दी है। आदेश में नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन इस आदेश के साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यही नियम नगर निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों के अपने कार्यों पर भी लागू होंगे?

नियमों का दायरा निजी बिल्डरों तक सीमित नहीं होना चाहिए

नगर निगम के आदेश के अनुसार प्रत्येक निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग, धूल नियंत्रण उपाय और परियोजना संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। लेकिन शहर में चल रहे अनेक सरकारी निर्माण कार्यों पर नजर डालें तो कई स्थानों पर इन नियमों का पालन होता दिखाई नहीं देता। ऐसे में नागरिकों का मानना है कि नियमों का दायरा केवल निजी बिल्डरों और ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

प्राक्कलन बोर्ड लगाने का नियम, लेकिन पालन कौन कर रहा है?

सरकारी निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कार्यस्थल पर प्राक्कलन राशि, कार्य का विवरण, निर्माण एजेंसी, स्वीकृति संख्या और कार्य अवधि का बोर्ड लगाया जाना चाहिए। इसके बावजूद शहर में निगम, जीएमडीए, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों द्वारा करवाए जा रहे अनेक कार्य ऐसे हैं जहां यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

खुदाई और निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण के मानकों की अनदेखी

शहर के कई हिस्सों में सड़क निर्माण, सीवर लाइन, नाला निर्माण और अन्य विकास कार्यों के दौरान बैरिकेडिंग और डस्ट कंट्रोल के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई देते। कई बार निर्माण सामग्री खुले में पड़ी रहती है और धूल आसपास के क्षेत्रों में फैलती रहती है। ऐसे में नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जिन मानकों को लागू करने के लिए निगम सख्ती दिखा रहा है, उनका पालन उसके अपने प्रोजेक्ट्स में कितना हो रहा है?

उद्घाटन समारोह में विकास की बातें, लेकिन नियमों पर नहीं ध्यान

अक्सर किसी परियोजना के उद्घाटन या निरीक्षण के दौरान विधायक, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन बहुत कम अवसरों पर यह देखा जाता है कि कार्यस्थल पर आवश्यक सूचना बोर्ड, सुरक्षा मानक और बैरिकेडिंग की स्थिति की भी समीक्षा की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की घोषणा के साथ-साथ नियमों के अनुपालन पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

जवाबदेही और पारदर्शिता की भी होनी चाहिए समान व्यवस्था

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि नगर निगम वास्तव में प्रदूषण नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो उसे निजी और सरकारी दोनों प्रकार की परियोजनाओं पर समान मानदंड लागू करने चाहिए। नियमों का पालन कराने वाली एजेंसियों को स्वयं भी उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।

अब निगम की कार्रवाई पर रहेगी सबकी नजर

नगर निगम ने सभी निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों को 15 दिनों के भीतर निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि कार्रवाई केवल निजी निर्माण स्थलों तक सीमित रहती है या फिर सरकारी विभागों और निगम के अपने प्रोजेक्ट्स पर भी समान रूप से लागू होती है।

नियम तभी प्रभावी होंगे जब पालन करने वाले भी पालन करें

धूल प्रदूषण रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना निश्चित रूप से आवश्यक है, लेकिन किसी भी नियम की विश्वसनीयता तभी स्थापित होती है जब उसे लागू करने वाली एजेंसियां स्वयं भी उसका पालन करती दिखाई दें। गुरुग्राम के नागरिक अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम इस मामले में दोहरे मापदंड अपनाने के बजाय सभी के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!