विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के नाम पर नफरत की राजनीति कर रही भाजपा : विद्रोही

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कहा—स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले ऐसा आयोजन समाज में कटुता बढ़ाने वाला

रेवाड़ी, 12 अगस्त 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता के बल पर ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाने के नाम पर सांप्रदायिक उन्माद और नफरत फैलाकर समाज को बांटने की राजनीति कर रही है।

विद्रोही ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के औचित्य पर गंभीर सवाल उठते हैं। उनका आरोप है कि भाजपा इस आयोजन के माध्यम से विभाजन की त्रासदी से सबक लेने के बजाय उसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा और संघ के वैचारिक पूर्वजों की स्वतंत्रता आंदोलन में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा से जुड़े अनेक तत्कालीन नेता ब्रिटिश शासन के समर्थक रहे तथा स्वतंत्रता आंदोलन से दूरी बनाए रहे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ऐतिहासिक अभिलेखों और तत्कालीन न्यायालयों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विद्रोही ने कहा कि जिन संगठनों के वैचारिक पूर्वजों पर आजादी के आंदोलन का विरोध करने के आरोप लगते रहे हैं, वे आज देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

‘दो-राष्ट्र सिद्धांत के इतिहास पर भाजपा जवाब दे’

विद्रोही ने कहा कि भाजपा को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि हिंदू और मुस्लिम को अलग-अलग राष्ट्र मानने का विचार सबसे पहले किसने प्रस्तुत किया था। उन्होंने दावा किया कि हिंदू महासभा से जुड़े विनायक दामोदर सावरकर ने मुस्लिम लीग के लाहौर प्रस्ताव से पहले हिंदू और मुस्लिम को दो राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया था, जिसे बाद में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग ने अपनी राजनीति का आधार बनाया।

उन्होंने यह भी कहा कि जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उस समय बंगाल की उस प्रांतीय सरकार में मंत्री रहे, जिसका नेतृत्व मुस्लिम लीग के ए.के. फजलुल हक कर रहे थे। विद्रोही के अनुसार, इन ऐतिहासिक तथ्यों पर खुली और निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि विभाजन की त्रासदी से जुड़े सभी ऐतिहासिक पक्षों को सामने रखने के बजाय भाजपा चुनिंदा तथ्यों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाजन में लाखों लोगों ने जान गंवाई, करोड़ों लोग विस्थापित हुए और दोनों ओर के समुदायों ने असहनीय पीड़ा झेली। इसलिए इस त्रासदी को सांप्रदायिक नफरत बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने का अवसर बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका के नाम पर समाज में अविश्वास और कटुता पैदा करना देश की एकता के लिए घातक है। भाजपा को इतिहास का राजनीतिक दुरुपयोग छोड़कर वर्तमान पीढ़ी को भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों की राह दिखानी चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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