गुरुग्राम के साहित्यकार अनिल श्रीवास्तव की पहली लघुकथा पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

गुरुग्राम/भोपाल, 20 जून। लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल (मध्य प्रदेश) के तत्वावधान में हिंदी भवन, भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय लघुकथा अधिवेशन एवं शोध संगोष्ठी के दौरान गुरुग्राम के साहित्यकार एवं हास्य-व्यंग्य कवि अनिल श्रीवास्तव के प्रथम लघुकथा संग्रह ‘मोह के धागे’ को प्रतिष्ठित ‘लघुकथा श्री’ कृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
लघुकथा दिवस के अवसर पर आयोजित इस राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में देशभर से आए साहित्यकारों और शोधकर्ताओं की उपस्थिति रही। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवेंद्र दीपक, शोध केंद्र समिति की निदेशक डॉ. कांता राय, उर्दू साहित्य अकादमी एवं मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद की निदेशक डॉ. नुसरत मेहंदी, साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद के पूर्व निदेशक उमेश कुमार सिंह, सारस्वत अतिथि डॉ. मिथिलेश दीक्षित तथा डॉ. ध्रुव कुमार मंचासीन रहे।
सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से प्राप्त लघुकथा पुस्तकों में से चयनित कृति ‘मोह के धागे’ को अतिथियों के करकमलों से सम्मानित किया गया। यह अनिल श्रीवास्तव का पहला लघुकथा संग्रह है। इससे पूर्व उनका कविता संग्रह ‘कपूरी महक’ तथा वीडियो सीडी ‘एक मुस्कान का वादा’ प्रकाशित हो चुके हैं।
अनिल श्रीवास्तव पिछले 25 वर्षों से ‘सुरुचि साहित्य कला परिवार’ सहित विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से साहित्य सेवा में सक्रिय हैं। हास्य-व्यंग्य लेखन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
चार सत्रों में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सम्मान समारोह के साथ-साथ विचार गोष्ठी, पुस्तक लोकार्पण तथा शोध-पत्र वाचन भी हुआ। हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 250 साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।









