सूर्योपासना, दान और अग्निहोत्र से बढ़ेगा आत्मबल व तेज, कई राशियों को मिलेगा विशेष लाभ
आचार्य डाॅ महेन्द्र शर्मा ‘महेश’

पानीपत। 21 जून को पड़ने वाला ग्रीष्म अयनांत (समर सोल्स्टिस) भारतीय वैदिक ज्योतिष एवं खगोलीय विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तरायण के चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है और पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिकतम 23.5 डिग्री झुक जाता है। इसके परिणामस्वरूप 21 जून से 24 जून 2026 तक वर्ष के सबसे बड़े दिन और सबसे छोटी रात्रियां रहेंगी।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन चार दिनों में दिनमान 35 घटी 10 पल रहेगा, जो लगभग 14 घंटे 4 मिनट के बराबर है। वहीं रात्रि का मान 24 घटी 50 पल अर्थात लगभग 9 घंटे 56 मिनट रहेगा। भारतीय ज्योतिष में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिनमान कहा जाता है, जिसकी गणना घटी और पल में की जाती है। एक घटी का मान 24 मिनट माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल, स्वास्थ्य, तेज, आध्यात्मिक प्रकाश और पिता का कारक ग्रह माना गया है। मान्यता है कि ग्रीष्म अयनांत के अवसर पर सूर्योपासना करने, सूर्य को अर्घ्य देने तथा अग्निहोत्र करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास, ओज, तेज और संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है। साथ ही राजकीय एवं प्रशासनिक कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा नेत्र संबंधी कष्टों में भी राहत मिलती है।
ज्योतिषाचार्यों ने श्रद्धालुओं को प्रातःकाल उदित होते सूर्य को जल अर्पित करने, अग्निहोत्र करने तथा गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र और लाल चंदन का दान करने की सलाह दी है। आक की लकड़ी से हवन करना भी विशेष फलदायी माना गया है।
राशिफल के अनुसार 21 से 24 जून के बीच कर्क, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के जातकों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन राशियों के लोगों को नेत्र संबंधी समस्याएं, पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता तथा सरकारी कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में अनुकूल परिणाम प्राप्त होने के संकेत हैं।
वैदिक परंपरा में ग्रीष्म अयनांत केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि सूर्य ऊर्जा, आध्यात्मिक साधना और आत्मविकास का विशेष अवसर माना जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई चेतना का संचार कर सकता है।









