विश्व योगासन चैंपियनों ने विधान सभा अध्यक्ष से साझा किए संघर्ष और सफलता के प्रेरक अनुभव

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हरविन्द्र कल्याण बोले – सामर्थ्यवान युवा शक्ति ही विकसित भारत-2047  का आधार

चंडीगढ़, 19 जून – प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में पदक विजेता खिलाड़ियों ने शुक्रवार को हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने अपने संघर्ष, पारिवारिक परिस्थितियों, योग से जुड़े अनुभवों, खेल उपलब्धियों तथा जीवन के लक्ष्यों और दृष्टिकोण पर खुलकर चर्चा की।

विधान सभा अध्यक्ष ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों पर बधाई देते हुए कहा कि योगासन खेल में उनका उत्कृष्ट प्रदर्शन न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य में भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ देश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति की निर्णायक भूमिका होगी। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और आधुनिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने की क्षमता, दोनों का समन्वय ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। योग विश्व को भारत की अमूल्य देन है और युवाओं में इसके प्रति बढ़ता आकर्षण देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने वाले अभिभावक विशेष सम्मान के पात्र हैं। समाज और परिवार की अपेक्षाओं पर खरा उतरना युवा खिलाड़ियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और संघर्ष किसी भी चुनौती को छोटा बना देते हैं।

विधान सभा अध्यक्ष ने हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन डॉ. जयदीप आर्य के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पित नेतृत्व में योग और योगासन खेल को नई पहचान मिल रही है तथा युवाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इस दौरान खिलाड़ियों ने अपने प्रेरणादायक अनुभव साझा किए। सोनीपत की सृष्टि दहिया ने बताया कि बचपन में कमजोर प्रतिरोधक क्षमता से जूझने के बावजूद योग ने उन्हें विश्व स्तर तक पहुंचाया। गुरुग्राम के अर्जुन ने आर्थिक चुनौतियों के बीच दो स्वर्ण पदक जीतकर मिसाल कायम की।

सोनीपत की देवांशी ने बताया कि अस्थमा से पीड़ित रहने के बावजूद योग के माध्यम से उन्होंने स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ बनाया। उनके अनुसार हर दिन का लक्ष्य स्वयं के पिछले प्रदर्शन से बेहतर करना होता है।

फरीदाबाद की मनीषा ने कहा कि योग ने उन्हें न केवल नकारात्मक सोच से बाहर निकाला, बल्कि आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता भी विकसित की। हिसार की मधु वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक पारिवारिक संकोच के बावजूद योग ने उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को नई दिशा दी तथा प्राणायाम ने तनाव और प्रतियोगी दबाव को नियंत्रित करने में मदद की।

पानीपत जिले के गांव उरलाना की खिलाड़ी देवी ने अपने किसान परिवार के सहयोग को सफलता का आधार बताया। नीलोखेड़ी के सुमित ने कहा कि स्कूल से शुरू हुई योग यात्रा ने उन्हें मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाया।

जींद के अभिषेक ने बताया कि दादा जी द्वारा लाई गई पुस्तक ‘योग साधना’ से प्रेरित होकर उन्होंने योग अपनाया, जिससे आत्मविश्वास और व्यक्तित्व दोनों का विकास हुआ। रेवाड़ी के नितिन कुमार ने कहा कि योग ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हुए समाज के प्रति संवेदनशीलता और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को मजबूत किया।

पंचकूला के संदीप ने बताया कि बचपन में हृदय संबंधी समस्या से परेशान रहने के बाद योग ने उन्हें नया जीवन दिया और आज वे विश्व स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप का आयोजन 4 से 8 जून तक अहमदाबाद में हुआ था, जिसमें 78  देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। हरियाणा के 11 खिलाड़ियों ने कुल 14 पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।

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Author: Bharat Sarathi

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