महिला आयोग सरकार की ढाल नहीं, बेटियों की आवाज बने; रेणु भाटिया नर्सिंग समुदाय से बिना शर्त माफी मांगें: पर्ल चौधरी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

“सत्ता के दबाव में नहीं, न्याय के पक्ष में खड़ा हो महिला आयोग”— रेणु भाटिया के बयान पर पर्ल चौधरी का तीखा हमला

गुरुग्राम। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका रवैया लगातार चयनात्मक और सरकार समर्थक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग का दायित्व महिलाओं और बेटियों को न्याय दिलाना है, लेकिन दुर्भाग्य से वर्तमान नेतृत्व में आयोग कई बार भाजपा सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालता हुआ नजर आता है।

पर्ल चौधरी ने कहा कि कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई जघन्य यौन उत्पीड़न की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध का नहीं बल्कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसे संवेदनशील मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कराने के बजाय नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर सार्वजनिक सवाल उठाने शुरू कर दिए। इससे यह संदेश गया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की व्यापक विफलताओं से ध्यान हटाकर एक वर्ग विशेष को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेशभर का नर्सिंग समुदाय स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा है। गुरुग्राम सहित विभिन्न जिलों में नर्सिंग एसोसिएशन द्वारा ज्ञापन सौंपे गए हैं और विरोध स्वरूप पेन-डाउन हड़ताल तक की घोषणा करनी पड़ी है। यह स्थिति स्वयं बताती है कि रेणु भाटिया की टिप्पणियों ने हजारों नर्सों और महिला स्वास्थ्यकर्मियों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

पर्ल चौधरी ने कहा कि हरियाणा की हजारों महिला नर्सें दिन-रात अस्पतालों में सेवाएं देकर लोगों का जीवन बचाने का कार्य करती हैं। किसी एक घटना की आड़ में पूरे नर्सिंग समुदाय की निष्ठा और कार्यशैली पर सवाल उठाना अन्यायपूर्ण है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना जांच निष्कर्ष के पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में खड़ा करना स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि रेणु भाटिया वास्तव में महिलाओं और बेटियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही होतीं तो नूंह जिले के इंधाना गांव की उस गरीब परिवार की बेटी के मामले में भी उतनी ही मुखर दिखाई देतीं, जिसने कथित सामूहिक दुष्कर्म, शोषण और उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में आरोपियों के नाम तक सामने आए, लेकिन लगभग बीस दिन बीत जाने के बावजूद महिला आयोग की अध्यक्ष की ओर से न तो कोई सख्त सार्वजनिक बयान आया और न ही पुलिस की कार्रवाई में हो रही देरी पर कोई सवाल उठाया गया। आखिर महिला आयोग ने यह नहीं पूछा कि नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है और पीड़ित परिवार को अब तक न्याय क्यों नहीं मिला?

पर्ल चौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में महिला आयोग की कार्यप्रणाली को देखकर बार-बार यह प्रतीत हुआ है कि आयोग महिलाओं और बेटियों की स्वतंत्र आवाज बनने के बजाय भाजपा सरकार की छवि बचाने में अधिक सक्रिय है। हरियाणा की बेटियां यह देख रही हैं कि किन मामलों में आयोग तुरंत सक्रिय हो जाता है और किन मामलों में चुप्पी साध लेता है।

उन्होंने कहा कि महिला आयोग की अध्यक्ष का दायित्व किसी सरकार का बचाव करना नहीं बल्कि हर पीड़िता के लिए समान संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ खड़ा होना है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में आयोग की निष्पक्षता पर लगातार प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

पर्ल चौधरी ने मांग की कि रेणु भाटिया अपने बयान से आहत हुए नर्सिंग समुदाय, विशेषकर महिला नर्सिंग कर्मचारियों से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें। साथ ही कुरुक्षेत्र मामले में अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के खिलाफ होने वाले हर अपराध पर महिला आयोग समान गंभीरता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!