मुख्यमंत्री नायब सैनी के बयान पर विद्रोही ने उठाए तीखे सवाल
भाजपा नेताओं और संगठन की बढ़ती संपत्ति की निष्पक्ष जांच की मांग
अहीरवाल के विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप, अधूरी परियोजनाओं पर जवाब मांगा
रेवाड़ी, 9 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के उस बयान पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सत्ता हमारे लिए सुख भोगने का साधन नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है।” विद्रोही ने सवाल किया कि यदि भाजपा वास्तव में सत्ता को जनसेवा का माध्यम मानती है तो पिछले दस वर्षों में हरियाणा में भाजपा और संघ परिवार के पास अरबों रुपये की चल-अचल संपत्ति आखिर कहां से आ गई?
उन्होंने कहा कि एक दशक पहले भाजपा और संघ के अधिकांश कार्यालय किराए के छोटे भवनों में संचालित होते थे, लेकिन आज प्रदेश के लगभग हर जिले में करोड़ों-अरबों रुपये की लागत से बने भव्य और आलीशान कार्यालय खड़े हैं। विद्रोही ने पूछा कि भाजपा के पास ऐसा कौन-सा उद्योग, व्यापार या आय का स्रोत है, जिससे इतनी विशाल संपत्ति और बैंकों में हजारों करोड़ रुपये की जमा पूंजी एकत्रित हो गई।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि सत्ता को सेवा का माध्यम बताने वाली भाजपा को जनता को यह भी बताना चाहिए कि इतनी बड़ी संपत्ति सेवा से अर्जित हुई है या फिर सत्ता के प्रभाव, भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से। उन्होंने कहा कि हरियाणा में भाजपा-संघ की बढ़ती संपत्ति सबके सामने है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता कभी साधारण आर्थिक स्थिति में थे, वे पिछले दस वर्षों में करोड़पति और अरबपति कैसे बन गए? सत्ता को सेवा का माध्यम मानने से ऐसा चमत्कार संभव नहीं लगता। भाजपा को जनता के सामने अपनी आय और संपत्ति का पूरा हिसाब देना चाहिए।
अहीरवाल क्षेत्र के विकास का मुद्दा उठाते हुए विद्रोही ने मुख्यमंत्री से पूछा कि यदि भाजपा सरकार क्षेत्रीय भेदभाव नहीं करती तो कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई अनेक परियोजनाएं आज भी अधूरी क्यों पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा घोषित कई योजनाएं भी या तो अधर में लटकी हुई हैं अथवा अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं।
विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के साथ विकास और सामाजिक सरोकारों के मामलों में भेदभाव होने की शिकायतें नई नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा के ही कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सार्वजनिक मंचों तथा मीडिया के माध्यम से समय-समय पर अहीरवाल की उपेक्षा और क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा उठाते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि यदि भेदभाव नहीं हुआ तो उनकी ही पार्टी के नेता इस विषय को बार-बार क्यों उठाते रहे।
उन्होंने कहा कि जनता अब केवल नारों और दावों से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि सत्ता, संपत्ति और विकास से जुड़े सवालों के तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब चाहती है।








