संसद परिसर में पूर्व शिक्षा मंत्री के स्वागत को छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान बताया, भाजपा पर जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप
रेवाडी, 28 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में सोमवार को पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में भाजपा सांसदों द्वारा नारे लगाना और उनका स्वागत करना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा के शासन में लोकलाज का कोई स्थान नहीं बचा है।
विद्रोही ने कहा कि छात्रों और युवाओं के व्यापक आंदोलन तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष के तीव्र विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। ऐसे में संसद परिसर में भाजपा सांसदों द्वारा उनका सार्वजनिक स्वागत करना न केवल छात्र-युवा आंदोलन का मजाक उड़ाना है, बल्कि विपक्ष को उकसाने वाला कदम भी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा जनभावना और लोकलाज में निहित होती है। यदि भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के प्रतीक रहे पूर्व मंत्री के समर्थन में सत्ता पक्ष खुलकर खड़ा होता है, तो इससे यह संदेश जाता है कि भाजपा जनमत और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं करती।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में भाजपा सांसदों का यह व्यवहार “संघी फासीवाद” की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश की जनता का उपहास उड़ाने वाली भाजपा और उसके सहयोगी दलों को लोकतांत्रिक तरीके से सबक सिखाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाने की बात करती है और विपक्ष से सहयोग मांगती है, वहीं दूसरी ओर पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की कथित विफलताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले विपक्ष तथा राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन को साजिश बताकर लोकतंत्र का उपहास कर रही है।
विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्षी सांसदों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री का राजनीतिक आचरण बार-बार यह संकेत देता है कि वे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।








