प्रकृति से एकात्म : भारतीय दर्शन और पर्यावरण चेतना

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भारतीय संस्कृति में प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, आस्था और सह-अस्तित्व का आधार है;

पर्यावरण संकट के दौर में यही दृष्टि मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

— विवेक रंजन श्रीवास्तव

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह लेख भारतीय संस्कृति की उस गहरी पर्यावरणीय चेतना की याद दिलाता है, जिसमें प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न अंग माना गया है। लेखक ने वेदों, उपनिषदों, गीता, लोक परंपराओं और त्योहारों के उदाहरणों के माध्यम से बताया है कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल भाव प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संतुलन का रहा है।

अथर्ववेद के “माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः” मंत्र से लेकर ईशावास्योपनिषद के “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा” तक, भारतीय चिंतन मनुष्य को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका पुत्र और सहभागी मानता है। यही कारण है कि यहां नदियों को माता, पर्वतों को देवस्वरूप और वृक्षों को जीवनदाता के रूप में सम्मान मिला।

लेख में गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियों, हिमालय, गोवर्धन पूजा, तुलसी, पीपल, बरगद और आंवला जैसे वृक्षों के सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि भारतीय परंपराओं ने पर्यावरण संरक्षण को आस्था और संस्कारों से जोड़कर समाज में स्थायी रूप से स्थापित किया। “दशपुत्रसमो द्रुमः” जैसे शास्त्रीय वचनों के माध्यम से वृक्षों के महत्व को रेखांकित किया गया है।

लेखक का मत है कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और वैश्विक तापमान वृद्धि जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारतीय संस्कृति का प्रकृति-केंद्रित दृष्टिकोण मानवता को एक संतुलित और टिकाऊ जीवनशैली का मार्ग दिखा सकता है। छठ पूजा जैसे लोकपर्वों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय आस्था मूलतः प्रकृति-अनुकूल और पर्यावरण-संवेदनशील रही है।

लेख का निष्कर्ष स्पष्ट है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों या तकनीकी उपायों से संभव नहीं होगा। इसके लिए भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश जैसे पंचमहाभूतों के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को पुनर्जीवित करना होगा। भारतीय संस्कृति की यही विरासत आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और हरित पृथ्वी देने का आधार बन सकती है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!