जीडीपी के 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर पहुंची मोदी सरकार, युवाओं के भविष्य के लिए खतरे की घंटी : कुमारी सैलजा

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भारी कर्ज लेकर झूठे प्रचार और दिखावटी विकास का भ्रम पैदा कर रही सरकार, रोजगार और आर्थिक स्थिरता पर मंडरा रहा संकट

चंडीगढ़, 5 जून। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को विकास के नाम पर कर्ज के दलदल में धकेल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार जीडीपी वृद्धि का दावा कर रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि देश का कर्ज उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में देश की आर्थिक स्थिरता और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

कुमारी सैलजा ने जारी बयान में कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008 में भारत की जीडीपी लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कर्ज इसी अवधि में 27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 214 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि जहां जीडीपी लगभग साढ़े तीन गुना बढ़ी है, वहीं सरकारी कर्ज करीब आठ गुना बढ़ गया है। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात लगभग 45 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी देश की आय की तुलना में उसका कर्ज अधिक तेजी से बढ़ रहा हो तो यह इस बात का संकेत है कि सरकार आर्थिक विकास को मजबूत उत्पादन, निवेश और रोजगार के बजाय उधार के सहारे आगे बढ़ा रही है। यह किसी भी जिम्मेदार अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने भारी कर्ज लेकर विकास का एक कृत्रिम वातावरण बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से विज्ञापन, प्रचार अभियानों, राजनीतिक आयोजनों और चुनावी लाभ के उद्देश्य से की जाने वाली घोषणाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा हो रही है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि देश का युवा आज बेरोजगारी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं, उद्योगों में नई नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा और छोटे एवं मध्यम उद्योग आर्थिक दबाव के कारण संकट में हैं। इसके बावजूद सरकार लगातार कर्ज लेकर अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। इसका सीधा असर युवाओं, किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि कर्ज लेना अपने आप में गलत नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण, रोजगार सृजन और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाए। लेकिन यदि कर्ज का इस्तेमाल केवल दिखावटी परियोजनाओं, प्रचार-प्रसार और चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाए तो उसका बोझ अंततः आम जनता और आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ता है।

सांसद ने कहा कि देश को ऐसी आर्थिक नीति की आवश्यकता है जो रोजगार आधारित विकास, कृषि एवं उद्योग को मजबूती, सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन पर आधारित हो। कांग्रेस हमेशा ऐसी नीतियों की पक्षधर रही है जो विकास के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करें।

कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे, बढ़ते कर्ज के उपयोग और उसके परिणामों की विस्तृत जानकारी जनता के सामने रखे तथा रोजगार और उत्पादन आधारित आर्थिक सुधारों पर प्राथमिकता से ध्यान दे।

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Author: Bharat Sarathi

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