स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल घोषणाओं से नहीं, जमीनी अमल जरूरी: वेदप्रकाश विद्रोही

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अहीरवाल क्षेत्र के अस्पतालों की बदहाली का उदाहरण देकर स्वास्थ्य मंत्री से पूछे कई सवाल

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, स्टाफ और दवाइयों की भारी कमी का आरोप

पुरानी योजनाएं अधूरी, नई घोषणाओं की भरमार पर उठे सवाल

गुरुग्राम/रेवाड़ी, 5 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव द्वारा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि केवल घोषणाएं करने से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं आने वाला। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा घोषित योजनाएं क्या वास्तव में धरातल पर लागू हो रही हैं और क्या मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उनका लाभ मिल रहा है?

विद्रोही ने कहा कि जब तक स्वास्थ्य मंत्री स्वयं जमीनी स्तर पर जाकर इन सवालों के जवाब नहीं तलाशेंगी, तब तक स्वास्थ्य विभाग में सुधार की बातें केवल कागजी घोषणाएं बनकर रह जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के अधिकांश सरकारी अस्पताल स्वयं बीमार अवस्था में हैं। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, सहायक स्टाफ, दवाइयां और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद करना कठिन है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में विभिन्न सरकारी अस्पतालों के विस्तार की घोषणाएं तो बार-बार की जाती हैं, लेकिन वर्षों तक उन पर अमल नहीं होता। स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि नई घोषणाएं करने से पहले पहले से घोषित योजनाओं को एक निश्चित समय सीमा में पूरा किया जाए। पुरानी योजनाओं के पूर्ण होने के बाद ही नई योजनाओं की घोषणा की जानी चाहिए।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार “पीछे छोड़-आगे दौड़” की नीति पर काम कर रही है, जिसके कारण न तो पुरानी योजनाएं पूरी हो पा रही हैं और न ही नई घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि यदि घोषित योजनाओं के अनुरूप पर्याप्त बजट ही आवंटित नहीं किया जा रहा, तो फिर इन योजनाओं को अमल में कैसे लाया जाएगा?

उन्होंने अहीरवाल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में भाजपा सरकार न तो गुरुग्राम के प्रस्तावित अस्पताल निर्माण को पूरा कर पाई है और न ही रेवाड़ी के 100 बिस्तरों वाले अस्पताल को 200 बिस्तरों का बना सकी है। इसके बावजूद अब उसी अस्पताल को 300 बिस्तरों का करने की घोषणा की जा रही है।

विद्रोही ने कहा कि नारनौल और महेंद्रगढ़ के सरकारी अस्पताल भी बजट के अभाव में अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं रेवाड़ी जिले के रामगढ़ भगवानपुर में मुख्यमंत्री आयुर्वेदिक कॉलेज की घोषणा कर आंदोलनरत ग्रामीणों का धरना तो समाप्त करा दिया गया, लेकिन घोषणा के एक माह बाद भी इसे विधिवत मंजूरी नहीं मिल पाई है।

उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और उनके परिवार की राजनीतिक कर्मभूमि अहीरवाल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति है और यह सब उनकी आंखों के सामने हो रहा है, तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

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Author: Bharat Sarathi

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