1857 के वीर सेनानियों के सम्मान में सरकार शीघ्र शुरू करे नसीबपुर स्मारक निर्माण, जनभावनाओं का हो सम्मान
रेवाडी/चरखी दादरी, 3 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने चरखी दादरी में बन रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज का नाम 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी राव तुलाराम के नाम पर रखने के हरियाणा सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अब इस संस्थान को राव तुलाराम राजकीय मेडिकल कॉलेज, चरखी दादरी के नाम से जाना जाएगा, जिससे स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक को उचित सम्मान मिला है।
विद्रोही ने कहा कि यह निर्णय केवल राव तुलाराम के प्रति सम्मान ही नहीं, बल्कि उन जागरूक नागरिकों की वर्षों पुरानी मांग और जनभावनाओं का भी सम्मान है, जिन्होंने कोरियावास मेडिकल कॉलेज का नाम राव तुलाराम के नाम पर रखने के लिए लगातार अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी हरियाणा सरकार को जिस क्षेत्र में बड़े शैक्षणिक, चिकित्सा अथवा अन्य संस्थान स्थापित किए जाएं, उनका नाम उस क्षेत्र के महापुरुषों के नाम पर रखने की नीति अपनानी चाहिए, ताकि स्थानीय इतिहास, संस्कृति और जनभावनाओं को सम्मान मिल सके।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि जिस प्रकार हरियाणा सरकार ने अंबाला में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की स्मृति में प्रदेश स्तरीय भव्य स्मारक का निर्माण किया है, उसी तर्ज पर अहीरवाल क्षेत्र में भी नसीबपुर-नारनौल में 1857 के स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में भव्य स्मारक का निर्माण शीघ्र शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में पहले ही लगभग दस वर्ष की देरी कर चुकी है और अब और विलंब उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि 16 नवंबर 1857 को नसीबपुर-नारनौल के ऐतिहासिक युद्ध में अहीरवाल, शेखावाटी, जाट और मेवात क्षेत्र के हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस का परिचय दिया था। एक ही दिन में लगभग पांच हजार वीरों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसा बलिदान न केवल भारत बल्कि विश्व इतिहास में भी अत्यंत दुर्लभ उदाहरण माना जाता है।
विद्रोही ने कहा कि नसीबपुर-नारनौल की धरती पर शहीद हुए इन महान स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए भव्य राष्ट्रीय स्तर का स्मारक बनाया जाना चाहिए। यह केवल इतिहास के प्रति सम्मान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, त्याग और बलिदान की प्रेरणा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।









