विनेश से नहीं, उसकी हिम्मत और वापसी से डरता है फेडरेशन का अहंकार : पर्ल चौधरी

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**- एशियन गेम्स ट्रायल्स विवाद पर महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने उठाए सवाल

कहा : खिलाड़ियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करे कुश्ती महासंघ**

गुरुग्राम। पर्ल चौधरी ने एशियन गेम्स ट्रायल्स के दौरान विनेश फोगाट के साथ हुए व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला केवल एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि खेलों में महिलाओं के सम्मान, समान अवसर और संस्थागत अहंकार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।

पर्ल चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी विनेश के रास्ते में बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें जारी रहीं। ट्रायल्स की सुबह अचानक 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने को लेकर सर्कुलर जारी किया गया, जबकि विनेश का वजन 53.9 किलोग्राम था। उनका कहना है कि इस फैसले का सीधा असर उन्हें प्रतियोगिता से बाहर करने के रूप में सामने आता। विरोध दर्ज कराने के बाद विनेश को 53 किलोग्राम वर्ग में खेलने की अनुमति दी गई।

उन्होंने कहा, “मैं स्वयं वहां मौजूद थी। अगर फेडरेशन वास्तव में विनेश का स्वागत कर रहा था तो फिर उसकी हार पर अधिकारी और समर्थक जश्न क्यों मना रहे थे? खेल प्रशासकों का काम निष्पक्ष रहना होता है, किसी खिलाड़ी की हार पर खुशियां मनाना नहीं।”

पर्ल चौधरी ने बताया कि विनेश जींद की पहलवान मीनाक्षी गोयत से हारीं, जबकि मीनाक्षी फाइनल में हिसार की अंतिम पंघाल से पराजित हुईं। अंतिम पंघाल अब भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने अंतिम पंघाल को जीत की बधाई देते हुए कहा कि यह हरियाणा की कुश्ती प्रतिभा की ताकत को दर्शाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हरियाणा से आते हैं, तो फिर कुश्ती महासंघ के शीर्ष पदों पर ऐसे लोग क्यों बैठे हैं जिनका मुख्य उद्देश्य खेलों का विकास नहीं, बल्कि राजनीति करना दिखाई देता है।

पर्ल चौधरी ने कहा, “अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियों को सदियों से अहंकारी सत्ताधारी कुचलने की कोशिश करते आए हैं। लेकिन विनेश फोगाट ने एक बार फिर साबित किया है कि संघर्ष करने वाली बेटियां झुकती नहीं हैं। उन्हें जितना रोका जाएगा, वे उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगी।”

उन्होंने कहा कि मातृत्व किसी खिलाड़ी के करियर का अंत नहीं, बल्कि उसकी ताकत का नया अध्याय है। विनेश ने आज फिर दिखा दिया कि असली चैंपियन केवल पदक नहीं जीतते, बल्कि अन्याय के सामने डटकर खड़े भी होते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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