देश का अनाज दो निजी कंपनियों को सौंपने की “भाजपाई साजिश बेनकाब : रणदीप सुरजेवाला

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कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने किया पुरजोर विरोध “एमएसपी का झूठ और साइलो सिस्टम के जरिए खाद्य सुरक्षा पर कब्जा”

चंडीगढ़, 30 मई 2026 – सांसद व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज बयान जारी करते हुए कहा कि “तीन काले कृषि कानूनों” से खेत-खलिहान हथियाने में नाकाम मोदी सरकार ने, अब देश का अनाज ही अपने “धन्नासेठों” की तिजोरियों में बंद रखने का इंतज़ाम कर डाला है।

सुरजेवाला ने कहा कि एमएसपी थी, एमएसपी है और एमएसपी रहेगी..” का झूठ परोसकर किसानों से ठगी और लूट करते-करते भाजपा सरकार ने एक तरफ किसानों को “कर्ज की सूली” पर चढ़ा दिया, तो दूसरी तरफ अपने पूंजीपति मित्रों के साथ मिलकर देश की “खाद्य सुरक्षा” को भी सरेआम ‘अडानी सहित दो कंपनियों के हाथ सौंपा जा रहा है।

भाजपा सरकार की किसान-विरोधी नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए सुरजेवाला ने कहा कि अब तो ऐसा लगने लगा है कि भाजपा सरकार के नीति आयोग सहित सारा सिस्टम ही इन कंपनियों के एजेंट की तरह काम कर रहा है। देश का अनाज भंडारण दो निजी कंपनियों, ‘अडानी एग्री लॉजिस्टिक लिमिटेड’ और ‘लीप इंडिया फूड एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ के हवाले करने के लिए मोदी सरकार ने एक झटके में सारे नियम, कानून, कायदे और जनहित को उठाकर ताक पर रख दिया।

सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार की “घोर किसान विरोधी नीति और नीयत” और अपने “मित्रों संग धंधे” का गंदा खेल देखिए कि मोदी सरकार ने अध्यादेश के जरिए 5 जून 2020 को सबसे पहले ‘तीन काले कृषि कानून’ देश पर थोपे। फिर 17 सितंबर 2020 को लोकसभा से और 20 सितंबर 2020 को राज्यसभा से इन्हें पास कराया गया। इसके बाद 27 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये काले कानून आधिकारिक रूप से लागू कर दिए गये। फिर लगभग 2 साल तक दिल्ली की सीमाओं पर चले “किसान आंदोलन” को कुचलने के लिए तानाशाही भाजपा सरकार ने दमन व क्रूरता की सारी हदें पार कर डालीं। आखिर में 700 से अधिक किसानों की शहादत लेने के बाद, 19 नवंबर 2021 को पीएम मोदी ने तीनों काले कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मगर काले कानून वापस लेने के बाद भी भाजपा की “खेती-किसानी विरोधी” काली नीयत नहीं बदली और नतीजा “साइलो सिस्टम” के रूप में सामने है।

सुरजेवाला ने कहा कि साल 2021 के आखिर में ही मोदी सरकार, स्टोरेज़ क्षमता को आधुनिक बनाने और 60 लाख मीट्रिक टन तक के अनाज भंडारण के नाम पर एफसीआई के जरिए ₹20,000 करोड़ का “साइलो (बड़े अनाज भंडार गृह) प्रोग्राम” लेकर आई। देश के खाद्य भंडारण पर किसी एक या दो निजी कंपनी का पूरा कब्जा ना हो जाए, इसी डर से FCI ने अपने शुरुआती ड्रॉफ्ट में “एकाधिकार विरोधी (एंटी-मोनोपोली) उपनियम” का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) ने FCI के फ़ाइनल ड्राफ़्ट से इस “एकाधिकार विरोधी” क्लॉज़ को ही पूरी तरह हटवा दिया।

सुरजेवाला ने कहा कि इसके बाद 2022 से 2025 के बीच दो चरणों में चले “साइलो प्रोग्राम” के टेंडर और ठेकों के वितरण में इसी “शातिराना छूट” का फ़ायदा उठाकर, अडानी एग्री. और लीप इंडिया. ने ₹16,500 करोड़ से ज्यादा कीमत के कॉन्ट्रैक्ट हथिया लिए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) के लिए देश में “अनाज भंडारण” को आधुनिक बनाए जाने के बहाने बनी इस योजना के 134 में से 110 साइलो के कॉन्ट्रैक्ट केवल दो निजी कंपनियों ने बटोर लिए। मतलब देश की कुल 60 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण क्षमता में से करीब 46.5 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 78% केवल इन्हीं दोनों कंपनियों के “साइलो सिस्टम” में सिमट जाएगी।

सुरजेवाला ने कहा कि देश में अनाज भंडारण पर इस “दिनदहाड़े कब्ज़े” के खिलाफ FCI से लेकर CCI तक की चिंताओं को खुद सत्ता के शीर्ष स्तर से रौंद दिया गया, ताकि “मित्र की मोनोपोली” को मजबूती मिले। हर सेक्टर में देश के सारे साधनों और संसाधनों की पूंजीपति मित्रों के साथ “लूट-बाँट” करती आ रही “बीजेपी एंड कंपनी” ने, देश की “खाद्य सुरक्षा” को भी “मित्रों को धंधा दो” की बलि चढ़ा दिया। देश का सारा अनाज भंडार दो निजी कंपनियों के कब्ज़े में देकर, “बीजेपी एंड कंपनी” जरूरत और मुसीबत के वक्त “जमाखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी” से लोगों को अब भूखों मार डालना चाहती है ?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि “आपदा में अवसर” और “मुसीबत में मुनाफ़े” को “मास्टरस्ट्रोक” बताने वाली “जनविरोधी” मोदी सरकार की रोज-रोज की उगाही और महंगाई की किश्तों से देश बुरी तरह त्रस्त है। “अनाजबंदी” की इस “भाजपाई साजिश” का कांग्रेस पार्टी और देश की जनता पुरजोर विरोध करेंगे।

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Author: Bharat Sarathi

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