अहीरवाल में जल संकट गहराया, वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री से नहरों में अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग की

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भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट से जूझ रहा दक्षिणी हरियाणा, जोहड़ों-तालाबों को भी भरने की उठी मांग

रेवाड़ी, 22 मई 2026। अहीरवाल सहित पूरे हरियाणा में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार से दक्षिणी हरियाणा की नहरों में पूर्व की तुलना में अधिक पानी छोड़े जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र इस समय गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है और आमजन को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विद्रोही ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि अहीरवाल क्षेत्र में जनस्वास्थ्य विभाग की अधिकांश पेयजल योजनाएं नहरी पानी पर आधारित हैं। भीषण गर्मी के कारण जहां लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना पानी चाहिए, वहीं विभाग पर्याप्त पेयजल आपूर्ति करने में विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बावजूद पहले जितनी भी जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।

उन्होंने बताया कि अहीरवाल क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए जवाहरलाल नेहरू नहर और इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से यमुना नदी का पानी पहुंचता है। लेकिन इन नहरों में केवल 14 से 16 दिनों तक पानी छोड़ा जाता है, जबकि उसके बाद 28 से 35 दिनों तक जलापूर्ति बंद रहती है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को लगातार पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है।

विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के “लंदन” कहे जाने वाले रेवाड़ी शहर की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। भाजपा सरकार के पिछले दस वर्षों के दौरान शहर में लगातार पानी की राशनिंग चल रही है। उन्होंने कहा कि हर महीने केवल 14 से 15 दिन ही नियमित पानी मिलता है, जबकि बाकी दिनों में कभी पानी आता है और कभी नहीं।

उन्होंने कहा कि गांवों में जोहड़ों और तालाबों में पानी नहीं होने से पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। बढ़ती गर्मी के बीच यह स्थिति मानवीय और पर्यावरणीय संकट का रूप ले रही है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि अहीरवाल क्षेत्र के सभी जोहड़ों और तालाबों को प्राथमिकता के आधार पर नहरी पानी से भरा जाए। इसके लिए जरूरी है कि अब से जून के अंतिम सप्ताह तक लगातार 40 दिनों तक जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी नहरों में यमुना का पानी निरंतर छोड़ा जाए, ताकि क्षेत्र में पेयजल संकट को कम किया जा सके और आमजन के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।

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Author: Bharat Sarathi

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