बिजली संकट का सामना कर रहा हरियाणा, सरकार लुटा रही सैंकड़ों करोड़ रुपये- हुड्डा

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बिना एक भी युनिट बिजली लिए सरकार ने तीस्ता कंपनी को लुटा डाला ₹1345 करोड़- हुड्डा

चंडीगढ़, 22 मई । पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि हरियाणा में भीषण गर्मी के कारण प्रदेश का बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर हांफने लगा है। राज्य के 17 जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि शहर और ग्रामीण इलाकों में हर दिन 3 से 14 घंटे तक के अघोषित बिजली कट लग रहे हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल रहे हैं। केबलों में आग लग रही है। फ्यूज उड़ने की हजारों शिकायतें रोज कंट्रोल रूम पहंच रहीं हैं। सरकार की ‘जगमग योजना’ वाले दावों के बीच गांवों में सिर्फ 10 से 12 घंटे बिजली मिल पा रही है. जिससे पेयजल और खेतों की सिंचाई का संकट भी खडा हो गया है।  हुड्डा ने कहा कि गर्मी का मौसम आते ही एकबार फिर बीजेपी सरकार के दावे हवा में उड़ने लगे और बिजली सप्लाई ठप पड़ गई। पूरे प्रदेश में लोग कई-कई घंटों के पावर कट झेल रहे हैं। इसके चलते लोगों के काम धंधे भी ठप हो रहे हैं। आज जनता गर्मी, महंगाई, मंदी और पावर कट की चौतरफा मार झेल रही है।

जबकि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में हरियाणा को पावर सरप्लस स्टेट बनाया था। कांग्रेस सरकार के दौरान 4 पावर प्लांट और 1 न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रेदश में स्थापित किए गए। लेकिन बीजेपी सरकार ने पूरे कार्यकाल में एक भी युनिट बिजली उत्पादन नहीं किया। यहां तक कि कांग्रेस द्वारा स्थापित प्लांट्स की कैपिसिटी को भी घटा दिया गया। इतना ही नहीं बिजली के दाम भी बेतहाशा बढ़ाए गए। बावजूद इसके लोगों को सरकार जरुरत के टाइम बिजली नहीं दे रही है।

पूरा हरियाणा बिजली संकट का सामना कर रहा है। जबकि दूसरी तरफ सरकार बिना बिजली खरीदे सैंकड़ों करोड़ रुपया लुटाने में लगी है। सरकार ने 1 यूनिट बिजली लिए बिना, 1345 करोड़ रुपए का भुगतान कर डाला। मामला सिक्किम के तीस्ता ऊर्जा लिमिटेड से जुड़ा है। हैरानी की बात है कि तिस्ता को बिना कैबिनेट, मुख्यमंत्री, बिजली मंत्री की मंजूरी के इतना रुपया दे दिया गया।

हुड्डा ने बताया कि कांग्रेस सरकार ने हरियाणा की बिजली जरुरत को पूरा करने के लिए  तिस्ता ऊर्जा के साथ 200 मेगावाट बिजली सप्लाई के लिए समझौता किया था। 2010 में इस पर हस्ताक्षर हुए और 2017 में कंपनी ने बिजली उत्पादन शुरू किया। लेकिन सरकार ने इस समझौते के तहत बिना बिजली लिए ही 1345 करोडो की रकम का भुगतान कर डाला। जबकि इस मामले को लेकर अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती तो जनता की गाढ़ी कमाई का यह राजस्व बच सकता था। सवाल खड़ा होता है कि सरकार बताए कि वह सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गई? इतने बड़े भुगताने के लिए सीएम, कैबिनेट व मंत्री ने मंजूरी क्यों नहीं ली?

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Author: Bharat Sarathi

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