18 दिन में सरसों और 15 दिन में गेहूं की “नाममात्र खरीद” का आरोप, 24 फसलों के दावे पर उठाए प्रश्न
रेवाडी, 15 अप्रैल 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि पिछले एक पखवाड़े में अहीरवाल क्षेत्र में सरकारी एजेंसियों द्वारा कितनी सरसों और गेहूं की खरीद की गई है।
विद्रोही के अनुसार, सरकार ने 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं की MSP पर खरीद शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन 18 दिन बीतने के बाद भी सरसों की खरीद बेहद सीमित रही है, वहीं 15 दिनों में गेहूं की खरीद भी नाममात्र ही हुई है। उन्होंने कहा कि रेवाड़ी, बावल, कोसली, नारनौल, अटेली, महेंद्रगढ़, पटौदी और गुरुग्राम की मंडियां गेहूं से भरी पड़ी हैं, लेकिन न तो खरीदे गए गेहूं का उठान हो रहा है और न ही खुले में पड़े अनाज की खरीद की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित सरकार के मंत्री और अधिकारी मीडिया में बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विद्रोही ने MSP पर 24 फसलों की खरीद के सरकारी दावे को भी “भ्रामक” बताया। उनका कहना है कि वास्तव में पिछले 12 वर्षों में केवल गेहूं, सरसों, बाजरा, धान और कपास जैसी सीमित फसलें ही MSP पर खरीदी गई हैं। उन्होंने कहा कि कई फसलें या तो हरियाणा में होती ही नहीं हैं, जैसे नारियल, रागी, जूट और कुसुम, जबकि मसूर, अरहर, उड़द और काले तिल जैसी फसलों का उत्पादन भी बेहद कम है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा गेहूं, सरसों, सूरजमुखी, धान, बाजरा, मक्का और कपास सहित केवल कुछ फसलों की ही अपेक्षाकृत अधिक खरीद की जाती है, बाकी फसलें “रामभरोसे” छोड़ दी जाती हैं।
विद्रोही ने हरियाणा सरकार को चुनौती देते हुए मांग की कि यदि सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है तो वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान खरीदी गई फसलों का मंडीवार पूरा विवरण सार्वजनिक करे। साथ ही 2025-26 में किन-किन मंडियों में कौन-कौन सी फसल MSP पर खरीदी जा रही है, इस पर एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए।








