प्रशासन की तत्परता से टला नाबालिग का विवाह, अभियान जारी रखने के निर्देश

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बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सख्ती बरकरार : एडीसी

गुरुग्राम, 15 अप्रैल। एडीसी सोनू भट्ट के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सोहना ब्लॉक के गांव दोहला में एक नाबालिग का विवाह समय रहते रुकवा दिया गया। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि 20 अप्रैल को एक नाबालिग लड़की का विवाह निर्धारित है, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।

जांच में लड़की की आयु 17 वर्ष पाई गई, जो निर्धारित कानूनी आयु से कम है। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने विवाह को रुकवा दिया। संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन के नेतृत्व में गठित टीम ने मौके पर परिजनों को कानून की जानकारी देते हुए जागरूक भी किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है।

बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध : एडीसी

एडीसी सोनू भट्ट ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार नाबालिगों का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें सजा और आर्थिक दंड शामिल हैं।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी, पुलिस हेल्पलाइन 112, संबंधित मजिस्ट्रेट या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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