20 महिलाओं सहित 55 मजदूरों की गिरफ्तारी पर उठे सवाल

गुरुग्राम, 13 अप्रैल 2026। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति गुरुग्राम ने मानेसर में न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। समिति ने 20 महिलाओं सहित 55 मजदूरों की गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग उठाई है।
महिलाओं पर दमन अस्वीकार्य, सरकार पर सवाल
प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए समिति की राज्य अध्यक्ष सविता, महासचिव उषा सरोहा, जिला सचिव भारती और अध्यक्ष रामवती ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन का मजदूरों, विशेषकर महिलाओं के प्रति दमनकारी रवैया बेहद निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों के साथ संवाद करने के बजाय बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
महंगाई के बीच मजदूरों की हालत दयनीय
समिति नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने मजदूर वर्ग का जीवन कठिन बना दिया है। मकान किराया, गैस सिलेंडर और खाद्य वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि के बावजूद मजदूरों को न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा। मजदूर 12-12 घंटे काम करने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं दिया जा रहा।
छह साल से वेतन संशोधन नहीं, कानूनों का नहीं हो रहा पालन
नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों से न्यूनतम वेतन का संशोधन नहीं किया गया है और श्रम कानूनों का पालन भी सुनिश्चित नहीं किया जा रहा। इन परिस्थितियों में मजदूरों द्वारा किए जा रहे आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है, जो चिंताजनक है।
आंदोलन के दबाव में बढ़ोतरी, फिर भी नाकाफी
समिति ने कहा कि मानेसर सहित विभिन्न स्थानों पर चल रहे आंदोलनों के दबाव में सरकार ने वेतन बढ़ोतरी की घोषणा तो की है, लेकिन यह वृद्धि मौजूदा महंगाई के मुकाबले अपर्याप्त है।
30 हजार न्यूनतम वेतन की मांग, 16 अप्रैल को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
जनवादी महिला समिति ने मांग की है कि सरकार दमन का रास्ता छोड़कर सभी गिरफ्तार मजदूरों को तुरंत रिहा करे और महंगाई के अनुरूप कम से कम 30,000 रुपये न्यूनतम वेतन लागू करे। साथ ही, समिति ने घोषणा की कि 16 अप्रैल को राज्यभर में आयोजित प्रदर्शनों में वह बढ़-चढ़कर भागीदारी करेगी।









