— “उद्योग को राहत देने का समय, बोझ बढ़ाने का नहीं” : विनोद बापना
गुरुग्राम, 13 अप्रैल (जतिन/राजा): मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच हरियाणा का उद्योग जगत इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते सप्लाई चेन बाधित हो रही है और कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है।
सीआईआई हरियाणा काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य और कैपेरो मारुति के सीईओ विनोद बापना ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है। कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती लागत ने उद्योगों के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में उद्योगों को राहत देने की जरूरत है, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की। “सरकार को चाहिए कि वह कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले उद्योग जगत को विश्वास में ले और उनके साथ व्यापक चर्चा करे,” बापना ने कहा।
प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है असर
विनोद बापना ने बताया कि प्रस्तावित न्यूनतम वेतन हरियाणा को उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी महंगा बना सकता है। इससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी और निवेश अन्य राज्यों की ओर पलायन कर सकता है।
एमएसएमई पर सबसे ज्यादा दबाव
उन्होंने विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि सीमित वर्किंग कैपिटल, बिजली के फिक्स्ड चार्ज, महंगे ईंधन और अब वेतन वृद्धि का दबाव कई इकाइयों को बंद होने की कगार पर पहुंचा सकता है।
सरकार के लिए सुझाव
उद्योग जगत की ओर से सरकार को निम्न सुझाव दिए गए हैं:
- न्यूनतम वेतन वृद्धि के प्रस्ताव की पुनः समीक्षा की जाए
- यदि वृद्धि आवश्यक हो, तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए
- श्रम-प्रधान और एमएसएमई उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज या सब्सिडी दी जाए
- अधिसूचना जारी करने से पहले उद्योग प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाए
अंत में बापना ने कहा कि हरियाणा का उद्योग जगत इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच लिया गया कोई भी असंतुलित निर्णय औद्योगिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और श्रम मंत्री अनिल विज से अपील की कि न्यूनतम वेतन वृद्धि के फैसले पर जल्द पुनर्विचार किया जाए, ताकि उद्योग और रोजगार दोनों सुरक्षित रह सकें।









