अंधेर नगरी बना गुरुग्राम, ‘तीन बाण’ लाइटें बनी शोपीस: पंकज डावर का आरोप

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— पुरानी चालू लाइटें हटाकर नई लगाई, लेकिन महीनों से बंद

— टैक्स के पैसे की बर्बादी और लापरवाही पर उठाए सवाल

गुरुग्राम। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने शहर की बदहाल व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए गुरुग्राम को “अंधेर नगरी” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में लगाई गई ‘तीन बाण’ वाली नई स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं और केवल शोपीस बनकर रह गई हैं, जबकि पहले से कार्यरत लाइटों को हटाकर यह नई व्यवस्था लागू की गई थी।

डावर ने ओल्ड रेलवे रोड समेत कई इलाकों का रात में दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर पहले रोशनी रहती थी, वहां अब अंधेरा पसरा है। “यह सीधा-सीधा जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुरानी लाइटें ठीक से काम कर रही थीं, तो उन्हें हटाकर नई लाइटें लगाने की क्या जरूरत थी—और यदि लगाई गईं, तो उन्हें चालू क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार यह केवल योजना की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का मामला भी है।

डावर ने मेट्रो रूट से जुड़े कार्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बसई से सेक्टर-9, सेक्टर-4/7 तक प्रस्तावित मेट्रो रूट पर पहले लाखों रुपये खर्च कर स्ट्रीट लाइट पोल और सुरक्षा जालियां लगाई गईं, लेकिन अब मेट्रो निर्माण के नाम पर पेड़ों की कटाई के साथ ही ये जालियां टूट चुकी हैं। “अगर पहले से मेट्रो का रूट तय था, तो यह खर्च क्यों किया गया? यह सीधी-सीधी वित्तीय अनियमितता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि शहर की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार लोग केवल बयानबाजी में लगे हैं। “जिस विधायक पर क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी है, वही या तो लापरवाह है या हालात से अनजान,” उन्होंने टिप्पणी की।

सड़कों की खराब हालत का जिक्र करते हुए डावर ने कहा कि वर्षों से टूटी सड़कों पर केवल पैचवर्क कर दिखावटी सुधार किया जाता है, जो कुछ ही दिनों में उखड़ जाता है। “यह भी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, क्योंकि सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब होती है,” उन्होंने आरोप लगाया।

डावर ने कहा कि गुरुग्राम जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले शहर की यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। बाहर से आने वाले लोग भी शहर की बदहाली देखकर सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत इस मामले का संज्ञान ले, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे और शहर की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुधारे।

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Author: Bharat Sarathi

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