IMT मानेसर में हुई अहम बैठक, उद्योग प्रतिनिधियों ने चरणबद्ध लागू करने की रखी मांग
गुरुग्राम, 10 अप्रैल 2026: श्रम विभाग गुरुग्राम द्वारा न्यूनतम वेतन वृद्धि के मुद्दे पर शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। IMT मानेसर स्थित HSIIDC कार्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता हरियाणा की अतिरिक्त श्रमायुक्त डॉ. अनुराधा लम्बा ने की।
बैठक में गुरुग्राम और रेवाड़ी क्षेत्र के करीब 10 प्रमुख औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (PFTI) के चेयरमैन दीपक मैनी, वाइस चेयरमैन डॉ. एस.पी. अग्रवाल, लेबर लॉ एडवाइजर एसोसिएशन गुरुग्राम के अध्यक्ष एडवोकेट आर.एल. शर्मा, मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन से राजेश गुप्ता, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव एस.के. आहूजा, कादीपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से श्रीपाल शर्मा, रेवाड़ी चैंबर ऑफ कॉमर्स से कृष्ण यादव, आईडीए सेक्टर-37 से सी.बी. सिंह, सोहना मेवात इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से आर.पी. खटाना और चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज से अश्वनी शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
श्रम विभाग की ओर से डिप्टी लेबर कमिश्नर नवीन शर्मा, सहायक श्रमायुक्त चंद्रपाल, मनोज कुमार, अनिल शर्मा और पवन कुमार भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित न्यूनतम वेतन वृद्धि पर चिंता और नाराजगी जताई। PFTI के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि एकमुश्त लगभग 4000 रुपये की वृद्धि विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि उद्योगों पर अचानक वित्तीय दबाव न पड़े और रोजगार पर प्रतिकूल असर न हो।
अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त श्रमायुक्त डॉ. अनुराधा लम्बा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार न्यूनतम वेतन वृद्धि को 1 अप्रैल 2026 से लागू करना अनिवार्य है। उन्होंने सभी उद्योग प्रतिनिधियों से इसका पूर्ण पालन सुनिश्चित करने और औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील की।
डिप्टी लेबर कमिश्नर नवीन शर्मा ने कहा कि यह वृद्धि श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे श्रमिकों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।
उन्होंने उद्योगों से समयबद्ध अनुपालन की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि विभाग उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं और सुझावों को उच्च स्तर तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य श्रमिक हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योगों के साथ संतुलित समन्वय बनाए रखना है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक शांति और विकास की गति बनी रहे।
वहीं, लेबर लॉ एडवाइजर एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट आर.एल. शर्मा ने कहा कि न्यूनतम वेतन वृद्धि श्रमिकों के हित में है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में उद्योगों की व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से उद्योगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने और संतुलित नीतियां बनाने की मांग की, ताकि श्रमिक कल्याण के साथ-साथ उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रहे।
बैठक में सभी पक्षों ने औद्योगिक शांति, सहयोग और संतुलित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।







