भारतीय योग संस्थान के 60वें स्थापना दिवस पर गरिमामय आयोजन

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हिसार में सीनियर सिटीजन क्लब में योग, भजन, ध्यान और प्रेरणादायक विचारों के साथ मनाया गया स्थापना दिवस

हिसार। भारतीय योग संस्थान का 60वाँ स्थापना दिवस आज प्रातः सीनियर सिटीजन क्लब में बड़े हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान की हिसार इकाई के प्रधान श्री सुरेश जांगड़ा के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि अध्यक्षता डॉ. जे. के. डांग ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आर. के. सैनी द्वारा संत कबीरदास के प्रसिद्ध भजन “बीत गए दिन भजन बिना रे” की मधुर प्रस्तुति से हुआ। इसके उपरांत श्री सुरेश जांगड़ा, डॉ. जे. के. डांग, डॉ. पुष्पा खरब, श्रीमती सुनीता बहल एवं डॉ. रामप्रताप द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत आरंभ किया गया। महिला साधकों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

योग अभ्यास सत्र के दौरान डॉ. बहल, श्रीमती सरोज नैन, श्रीमती सरोज करवासरा एवं श्री हुड्डा ने विभिन्न योगासन करवाए। वहीं, श्रीमती सुनीता वधवा ने प्राणायाम का अभ्यास करवाया और श्री सुरेश जांगड़ा ने ध्यान की क्रियाओं का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. पुष्पा खरब ने “योगिजन ऐसे दीनदयाल, योग से रोग भगाते हैं” गीत प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया।

डॉ. रामप्रताप ने भारतीय योग संस्थान के इतिहास एवं स्थापना दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान की स्थापना 10 अप्रैल 1967 को स्वर्गीय प्रकाश लाल द्वारा मानव कल्याण के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्था ‘जियो और जीने दो’ के मूलमंत्र पर चलते हुए नि:शुल्क योग के माध्यम से समाज को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए कार्य कर रही है। संस्थान का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है और यह एक गैर-लाभकारी सांस्कृतिक संस्था है।

श्री सुरेश जांगड़ा ने संस्थान की पत्रिका “योग मंजरी” के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आज हिसार के 15 योग केंद्रों में स्थापना दिवस मनाया गया।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. जे. के. डांग ने संस्थान की गतिविधियों की सराहना करते हुए सभी पदाधिकारियों और साधकों के निस्वार्थ सेवा भाव की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय योग संस्थान नि:शुल्क योग के माध्यम से देश-विदेश में मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहा है और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे भारतीय संस्कृति के आदर्शों को बढ़ावा दे रहा है।

कार्यक्रम के अंत में श्रीमती बिमला रोहिला द्वारा वैदिक प्रार्थना एवं शांति पाठ किया गया। मंच संचालन श्रीमती सुनीता बहल ने कुशलतापूर्वक किया और अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। समापन पर डॉ. पुष्पा खरब के सौजन्य से प्रसाद स्वरूप हलवा वितरित किया गया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!