₹15,220 नहीं, ₹30,000 हो न्यूनतम वेतन: एआईयूटीयूसी का सरकार पर ‘मजदूर विरोधी’ फैसले का आरोप

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मजदूरों का आरोप—सरकार ने आंदोलन दबाने के लिए की नाममात्र वेतन वृद्धि

त्रिपक्षीय प्रणाली की अनदेखी, ₹30,000 न्यूनतम वेतन की उठी मांगAIUTUC ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण,

प्रदेशभर में आंदोलन तेज करने का आह्वान

गुड़गांव, 9 अप्रैल 2026। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) हरियाणा के प्रधान कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने राज्य सरकार के न्यूनतम वेतन बढ़ाने के फैसले को मजदूरों के साथ “धोखा” करार दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से गुड़गांव की विभिन्न फैक्ट्रियों में श्रमिक अपने मासिक वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।

कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि मजदूरों की इस जायज आवाज को सरकारी तंत्र और निजी ताकतों के सहारे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल 2026 को हरियाणा मंत्रिमंडल द्वारा न्यूनतम वेतन बढ़ाने की घोषणा भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है, जिसका उद्देश्य मजदूर आंदोलन को कमजोर करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यूनतम वेतन का निर्धारण त्रिपक्षीय प्रणाली के तहत होना चाहिए, जिसमें सरकार, प्रबंधन और श्रमिक पक्ष की सहमति शामिल होती है। तय मानकों के अनुसार एक परिवार की तीन इकाइयों के लिए प्रतिदिन प्रति इकाई 2700 कैलोरी युक्त भोजन, उस पर 35 प्रतिशत ईंधन व मकान किराया तथा 25 प्रतिशत शिक्षा और अन्य सामाजिक जरूरतों का खर्च जोड़ा जाता है।

इन मानदंडों के आधार पर कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने दावा किया कि हरियाणा में मजदूरों का न्यूनतम वेतन कम से कम ₹30,000 प्रतिमाह होना चाहिए। इसके विपरीत सरकार द्वारा घोषित ₹15,220 प्रतिमाह को उन्होंने मनमाना, अन्यायपूर्ण और मजदूर विरोधी बताया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीते एक वर्ष से श्रम विभाग न्यूनतम वेतन संशोधन के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभा रहा है, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से मजदूरों को कोई ठोस लाभ नहीं मिला।

एआईयूटीयूसी हरियाणा प्रदेश कमेटी ने गुड़गांव सहित पूरे प्रदेश के मजदूरों से आह्वान किया है कि ₹30,000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन उनकी वैध मांग है और इसे हासिल करने के लिए आंदोलन को जारी रखा जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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