• 4 हजार की बढ़ोतरी से एमएसएमई पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, चरणबद्ध लागू करने की मांग
गुरुग्राम, 09 अप्रैल। हरियाणा में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को 11,257 रुपए से बढ़ाकर 15,200 रुपए प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव ने उद्योग जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी ने इस प्रस्तावित वृद्धि को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
दीपक मैनी ने कहा कि करीब 4,000 रुपए प्रतिमाह की सीधी बढ़ोतरी उद्योगों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भारी पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बढ़ोतरी केवल वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि ईपीएफ, ईएसआई, बोनस और ग्रेच्युटी जैसी वैधानिक देयताओं को जोड़ने पर प्रति कर्मचारी करीब 7,000 रुपए तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उद्योगों पर पड़ेगा।
उन्होंने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहले से ही कच्चे माल की कीमतों, उत्पादन लागत और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में एकमुश्त वेतन वृद्धि कई एमएसएमई इकाइयों को बंद होने की कगार पर ला सकती है, जिससे रोजगार पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
मैनी ने आशंका जताई कि यदि यह निर्णय बिना चरणबद्ध योजना के लागू किया गया, तो कई उद्योग अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इससे हरियाणा की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और निवेश माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि पीएफटीआई ने पहले ही श्रम विभाग, हरियाणा को सुझाव दिया था कि न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। उनके अनुसार, 4,000 रुपए की वृद्धि को पांच वर्षों में किस्तों में लागू करना अधिक व्यावहारिक होता, जिससे उद्योगों को अचानक आर्थिक दबाव का सामना न करना पड़े।
दीपक मैनी ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले उद्योग संगठनों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा संतुलित समाधान निकाला जाए, जिससे श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योगों की स्थिरता और विकास भी सुनिश्चित हो सके।







