हरियाणा में पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में मिलेगा 20 प्रतिशत आरक्षण
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने अग्निवीर नीति, 2024 को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 8 अप्रैल —हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित कैबिनेट की बैठक में अग्निवीर नीति, 2024 को स्वीकृति प्रदान की गई। इससे पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने तथा वर्दीधारी सेवाओं और सुरक्षा से संबंधित पदों में उनके कौशल का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

साथ ही उन्हें हरियाणा सरकार के अधीन सेवाओं/पदों, जैसे कि फॉरेस्ट गार्ड (पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग), वार्डर (कारागार विभाग) तथा माइनिंग गार्ड (खान एवं भूविज्ञान विभाग) में वर्तमान 10 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल आरक्षण को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पूर्व में हरियाणा के अधिवासी पूर्व अग्निवीरों को कुछ ग्रुप ‘सी’ पदों, जिनमें फॉरेस्ट गार्ड, वार्डर और माइनिंग गार्ड शामिल हैं, में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया हुआ था। इसके पश्चात, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विभिन्न सेवाओं/पदों की भर्ती में, जहां उनके विशेष सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक क्षमता, अनुशासन और फील्ड अनुभव का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की सलाह दी थी।
मंत्रिमंडल के इस निर्णय को सभी चालू तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में लागू करने के लिए संबंधित प्रशासनिक विभागों को आवश्यक संशोधन करने तथा संशोधित निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसी में महत्वपूर्ण संशोधनों को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 8 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 (अधिनियम संख्या 8 ऑफ 1975) के अंतर्गत लाइसेंस प्रदान करके नियोजित रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसीमें संशोधन को मंजूरी दी गई।
ऐसा वृद्धजनों की आबादी को ध्यान में रखते हुए उनकी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसीमें संशोधन किया गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, धारा 5(ii) के तहत, 20 अक्टूबर, 2020 की नीति में समय-समय पर किए गए संशोधनों के अनुसार निर्धारित दृष्टिकोण मानदंड लागू रहेंगे।
इसके अलावा हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) नीति, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप, मंत्रिमंडल ने रिटायरमेंट हाउसिंग कॉलोनियों के लिए अनुमत फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में वृद्धि को मंजूरी दे दी गई है। टीडीआर के माध्यम से अतिरिक्त एफएआर को मौजूदा अनुमत एफएआर 2.25 से बढ़ाकर 3.0 कर दिया गया है। यह लाभ संशोधन की अंतिम अधिसूचना की तिथि से लागू होगा।
यह संशोधन ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली से प्राप्त एक अभ्यावेदन के बाद किया गया है, जिसमें प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मौजूदा नीतिगत ढांचे में बदलाव की मांग की गई थी।
हरियाणा कैबिनेट ने पीडीएस सुधारों और उचित मूल्य की दुकानों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को मंजूरी दी
चंडीगढ़, 8 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उचित मूल्य की दुकानों के लाइसेंस आवंटन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को मंजूरी दी। इससे प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के कामकाज को और अधिक सुदृढ़ तथा सुव्यवस्थित करने में सहयोग मिलेगा। कैबिनेट ने ‘हरियाणा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (लाइसेंसिंग एवं नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2026’ को अपनी सहमति प्रदान की, जो मौजूदा ‘हरियाणा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (लाइसेंसिंग एवं नियंत्रण) आदेश, 2022’ में संशोधन करेगा।
ये संशोधन पूरे राज्य में उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के आवंटन और संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने, दक्षता में सुधार करने और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं। इनका उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं को इस प्रणाली में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करके समावेशिता और व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
संशोधित प्रावधानों के तहत, उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित और युक्तिसंगत बनाया गया है। आवेदकों के लिए अब न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10+2 (बारहवीं पास) होना, साथ ही कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान होना आवश्यक होगा। आवेदकों के लिए आयु सीमा 21 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, और आवेदकों के पास एक वैध ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) होना तथा संबंधित क्षेत्र का निवासी होना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, सरकारी कर्मचारियों, मौजूदा लाइसेंस धारकों और उनके निकटतम परिवार के सदस्यों, साथ ही स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया से अयोग्य घोषित किया गया है।
इसमें कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनके तहत यदि कोई लाइसेंस धारक बाद में किसी स्थानीय निकाय में निर्वाचित पद ग्रहण करता है या सरकारी सेवा में शामिल होता है, तो उसे अपना लाइसेंस वापस (सरेंडर) करना होगा; ऐसा न करने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
इसे ‘रोस्टर प्रणाली’ के आधार पर लागू किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर तीसरा लाइसेंस महिलाओं के लिए आरक्षित हो। महिलाओं के लिए निर्धारित इस कोटे के भीतर, एसिड हमले की पीड़ितों, महिला स्वयं सहायता समूहों (प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक), विधवाओं और तलाकशुदा/एकल माताओं, तथा SC/BC और सामान्य श्रेणी की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस संशोधन में पारदर्शिता पर भी काफ़ी ज़ोर दिया गया है। इसके तहत, लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया सरल (SARAL) पोर्टल पर एक ऑनलाइन सिस्टम के ज़रिए पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। आवेदन मंगाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिसमें स्थानीय स्तर पर घोषणाएँ और अखबारों में विज्ञापन शामिल होंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योग्य आवेदकों को इस प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी मिले और वे इसमें हिस्सा ले सकें।
यह संशोधन विभिन्न परिभाषाओं और कामकाज से जुड़े पहलुओं को और भी स्पष्ट करता है, ताकि उन्हें ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ के अनुरूप बनाया जा सके। यह ‘वस्तु’ (commodity) और ‘परिवार’ जैसे अहम शब्दों को ज़्यादा सटीक तरीके से परिभाषित करता है। इसके लिए, इन शब्दों को राशन कार्ड और ‘परिवार पहचान पत्र’ के रिकॉर्ड से जोड़ा गया है।
इस संशोधित आदेश से ‘उचित मूल्य की दुकानों’ (Fair Price Shops) के मालिकों के लिए कानूनी और शिकायत निवारण से जुड़े ढाँचे को भी मजबूती मिली है। इसमें एक नई ‘पुनरीक्षण प्रणाली’ (revision mechanism) शुरू की गई है। इसके तहत, अगर कोई भी पक्ष ‘उपायुक्त’ के किसी फैसले से असंतुष्ट है, तो वह 30 दिनों के भीतर ‘मंडलायुक्त’ के सामने पुनरीक्षण के लिए आवेदन कर सकता है।
हरियाणा राज्य में लागू पंजाब कोर्टस एक्ट, 1918 की धारा- 30 में संशोधन को मंज़ूरी
चंडीगढ़, 8 अप्रैल – हरियाणा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा राज्य में लागू पंजाब कोर्टस एक्ट, 1918 की धारा- 30 में संशोधन को मंज़ूरी दी गई।
इसका उद्देश्य पुराने कानूनों के रेफरेंस को अपडेट करके मौजूदा कानूनी उलझनों को दूर करना है। वर्तमान एक्ट के सेक्शन 30 में इंडियन सक्सेशन एक्ट 1865 और प्रोबेट एंड एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट 1881 दोनों के स्थान पर इंडियन सक्सेशन एक्ट 1925 लाया गया है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस अंतर को राज्य सरकार के संज्ञान में लाये और ज़रूरी बदलावों की सिफारिश की थी।
इन सुझावों पर अमल करते हुए कैबिनेट ने पंजाब कोर्टस एक्ट, 1918 के सेक्शन 30 के सब-सेक्शन (2) के क्लॉज़ (ए) में “इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1865 (X of 1865) और प्रोबेट एंड एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट, 1881 (V of 1881)” शब्दों की जगह “इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925” शब्दों को प्रतिपादित करने को मंज़ूरी दी है।
इस संशोधन अनुसार इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के तहत होने वाली कार्रवाई, जिसे डिस्ट्रिक्ट जज नहीं निपटा सकते थे, अब बदले हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत ठीक से कर सकेंगे और इससे कानूनी प्रक्रियाओं में एकरूपता और स्पष्टता सुनिश्चित होगी।
‘शामलात देह’ (साझा भूमि) से होकर रास्ता देने की नीति को मंजूरी
चंडीगढ़, 8 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) नियम, 1964 में संशोधन और निजी परियोजनाओं के लिए ‘शामलात देह’ (साझा भूमि) से होकर रास्ता देने की नीति को मंजूरी दी गई। इन नियमों को ‘हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) संशोधन नियम, 2026’ कहा जाएगा।
कैबिनेट ने हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) नियम, 1964 में नियम 5A जोड़ने को मंज़ूरी दी। इस नियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसी परियोजना स्थापित करना चाहता है जिसके लिए संबंधित प्राधिकरण से CLU या लाइसेंस की आवश्यकता है, और जिसकी परियोजना भूमि तक पहुँचने के लिए या तो कोई रास्ता नहीं है, या फिर CLU/लाइसेंस की शर्तों को पूरा करने के लिए रास्ता अपर्याप्त है; तो संबंधित ग्राम पंचायत के 3/4 बहुमत और ग्राम सभा के 2/3 बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर, राज्य सरकार उस पंचायत की शामलात भूमि में एक नया रास्ता निर्धारित कर सकती है, ताकि उस परियोजना भूमि तक पहुँचना सुनिश्चित हो सके।
यह नया रास्ता पंचायत के ही स्वामित्व में रहेगा और इसका उपयोग सभी लोग (साझा रूप से) कर सकेंगे। इस प्रकार रास्ता निर्धारित करने की शर्त यह होगी कि परियोजना/लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र के 5% हिस्से का स्वामित्व अधिकार, या फिर ग्राम पंचायत द्वारा रास्ते के लिए निर्धारित भूमि के आकार का चार गुना हिस्सा—इनमें से जो भी अधिक हो—उसे सरकार को हस्तांतरित करना होगा। इस प्रकार हस्तांतरित की गई भूमि परियोजना के लिए स्वीकृत कुल क्षेत्र का ही एक हिस्सा मानी जाएगी। यह भूमि पूरी तरह से विकसित रूप में और परियोजना के शेष क्षेत्र में उपयोग की जा रही अन्य सभी उपयोगिता सेवाओं (जैसे बिजली, पानी आदि) तक पहुँच के साथ उपलब्ध कराई जाएगी।अन्य नियम और शर्तें वे होंगी जो राज्य सरकार समय-समय पर निर्धारित करेगी, और संबंधित व्यक्ति को इन सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। इस नियम के तहत तैयार की गई एक नीति को भी मंज़ूरी दी गई, जिसमें अन्य शर्तों और ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) का विस्तृत विवरण दिया गया है।
विशेष रूप से, बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ, आवास परियोजनाएँ, औद्योगिक परियोजनाएँ, वाणिज्यिक परियोजनाएँ आदि जैसी विभिन्न परियोजनाओं के लिए सरकार के अलग-अलग विभागों से CLU और लाइसेंस जैसी विभिन्न अनुमतियों की आवश्यकता होती है।
इसके साथ ही, संबंधित विभागों की नीतियों द्वारा निर्धारित चौड़ाई (चौड़ाई के मानक) के अनुसार उपयुक्त रास्ते की उपलब्धता भी इन परियोजनाओं के लिए अनिवार्य होती है। ऐसे मामलों में, पूर्व में ‘शामलात देह’ (गाँव की साझा जमीन) से होकर रास्ता देने में कठिनाइयाँ आई हैं, क्योंकि रास्ते के लिए इस्तेमाल होने वाली ऐसी जमीन को बेचना या लंबी अवधि के लिए पट्टे पर देने की अनुमति नहीं है। इसलिए, इस प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से, उक्त संशोधनों को मंजूरी दी गई ।









