सीटू ने सरकार को चेताया—वेतन बढ़ोतरी, ठेका प्रथा खत्म और “समान काम-समान वेतन” लागू नहीं हुआ तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन

मानेसर/गुड़गांव, 8 अप्रैल 2026: हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में ठेका मजदूरों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। गारमेंट्स और ऑटो सेक्टर के हजारों मजदूर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं। मजदूर संगठन सीटू (CITU) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन पूरे राज्य में फैलाया जाएगा।
सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान और उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने हड़ताली मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा में न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये किया जाए, ठेका मजदूरों को स्थाई किया जाए और “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत लागू किया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगों में श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्थाई प्रकृति के कामों के लिए ठेका मजदूरों से काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें स्थाई कर्मचारियों के मुकाबले बेहद कम वेतन दिया जाता है। कई मजदूर 10-15 साल से काम कर रहे हैं, फिर भी उन्हें महज 10-11 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। वहीं 12-12 घंटे काम लेने के बावजूद ओवरटाइम का डबल भुगतान नहीं किया जा रहा।
महंगाई के मुद्दे पर भी मजदूर नेताओं ने सरकार को घेरा। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद जरूरी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। एलपीजी गैस, जो पहले 80-90 रुपये प्रति किलो मिलती थी, अब 400-500 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि मजदूरों की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

सीटू नेताओं ने बताया कि हरियाणा सरकार ने पिछले छह वर्षों से न्यूनतम वेतन में कोई संशोधन नहीं किया है। सरकार द्वारा गठित कमेटी, जिसमें श्रम विभाग, उद्योग प्रतिनिधि और ट्रेड यूनियन शामिल थे, ने 29 दिसंबर 2025 को पानीपत में हुई बैठक में सर्वसम्मति से 23,196 रुपये न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव भेजा था। इसके बावजूद सरकार ने बजट भाषण में 15,200 रुपये वेतन की घोषणा की, जिसका अभी तक नोटिफिकेशन भी जारी नहीं हुआ।
मजदूर संगठनों ने मांग की है कि कम से कम कमेटी की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही ओवरटाइम का डबल रेट, सस्ती दरों पर घरेलू एलपीजी गैस और ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थाई रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
सीटू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो हरियाणा के सभी औद्योगिक शहरों में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।








