मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में कैजुअल मजदूरों की हड़ताल तेज, वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग

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मुख्य मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और उग्र, यूनियन की चेतावनी

गुरुग्राम, 7 अप्रैल 2026। गुरुग्राम के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में अस्थायी (कैजुअल) मजदूरों ने वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर व्यापक हड़ताल शुरू कर दी है। रूप पोलिमर, रुचिका गारमेंट्स, सत्यम ऑटो, मुंजाल शोवा सहित करीब 10 कंपनियों के मजदूर इस आंदोलन में शामिल हैं।

मजदूरों का आरोप है कि उन्हें केवल 11,000 से 12,500 रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता है, चाहे वे हेल्पर हों, मैकेनिक हों या अन्य श्रमिक। ओवरटाइम का भुगतान भी सिंगल रेट पर किया जा रहा है, जिसे उन्होंने पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया। बढ़ती महंगाई के बीच, जहां आवश्यक वस्तुओं के दाम 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, मजदूरों का जीवन यापन बेहद कठिन हो गया है। एलपीजी कनेक्शन के अभाव में कई मजदूरों को 500 रुपये प्रति किलो तक महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है।

मजदूरों ने प्रबंधन पर दुर्व्यवहार के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें अपमानित किया जाता है और मांग उठाने पर नौकरी से निकालने या गेट बंद करने की धमकी दी जाती है।

हाल ही में 3 अप्रैल को हुए आंदोलन के बाद (Honda Motorcycle and Scooter India) होंडा में मजदूरों के साथ हुए समझौते में 5,000 रुपये वेतन वृद्धि पर सहमति बनी थी। हालांकि मजदूरों का आरोप है कि प्रबंधन इस समझौते को लागू करने में आनाकानी कर रहा है।

ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को चेतावनी दी है कि समझौते को तत्काल लागू किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्थिति की गंभीरता के बावजूद प्रशासन और श्रम विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मजदूरों का आरोप है कि प्रशासन उल्टा उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जो निंदनीय है।

आज AIUTUC का प्रतिनिधिमंडल जिला सचिव श्रवण कुमार गुप्ता के नेतृत्व में, ट्रेड यूनियन काउंसिल के नेता अनिल पवार एडवोकेट और इंकलाबी मजदूर केंद्र के साथियों के साथ हड़ताली मजदूरों के बीच पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए उन्हें पूरा समर्थन दिया।

AIUTUC ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए, श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और मजदूरों पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाना तत्काल बंद किया जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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