पार्टी लाइन से हटकर राजनीति..?

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-कमलेश भारतीय

आम आदमी पार्टी ने अपने ही राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी लाइन से हटकर संसद में मामले उठाने के चलते संसद सचिव को चिट्ठी लिख दी है कि राघव चड्ढा को बोलने का समय न दिया जाये और इसके साथ ही राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाये जाने की भी सूचना दी गयी है। ऐसे लगा जैसे आप राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में शाॅटगन शत्रुघ्न सिन्हा की आत्मा प्रवेश कर गयी, जिसने अपने ही सांसद को ‘खामोश’ करने में देर नहीं लगाई।

राघव चड्ढा इस बात से सकते में आ गये लेकिन उन्हे़ं साथी नेताओं ने बताया कि आप पार्टी लाइन से हटकर ‘समोसे’ की कीमतों जैसे मुद्दे उठा रहे थे जबकि आप पंजाब से राज्यसभा में आये और किसानों की समस्याओं की बात तक नहीं करते ! क्यों? कमाल है यह समोसा भी ! फिल्म में गाना बनकर खुश कर देता है- जब तक समोसे में आलू रहेगा लेकिन यही ‘समोसा’ राजनीति में घुस कर नयी नयी खुराफात कर रहा है, कभी स्टार्टअप तो कभी पार्टी लाइन बनकर ! अब समझ आया कि समोसे की कीमतों में उछाल क्यों आया? राघव चड्ढा ने भी अपनी सफाई देते वीडियो जारी करते कहा कि मैं तो ‘आम आदमी’ के मुद्दे उठा रहा था लेकिन ‘आम आदमी पार्टी’ को ये अच्छे नहीं लगे और अपनी ही पार्टी ने उन्हे़ं खामोश रहने का आदेश कर दिया ! यह समोसा न हुआ बल्कि राजनीति का ब्रह्मास्त्र बनता जा रहा है ! राघव चड्ढा पर यह भी कहा गया कि राजनीति में जनता के मुद्दे उठाने होते हैं लेकिन आपने तो डर डर कर समोसे व डोसे की कीमतों के ऐसे मुद्दे उठाये कि पार्टी लाइन से बाहर चले गये । भाई राघव चड्ढा, राजनीति में जो डर गया, सो मर गया। ऐसे डर डर कर राजनीति नहीं हो सकती ! एक बार भी भाजपा की नीतियों पर हमला नहीं बोला, भाजपा को ज़रा भी आंच नहीं आने दी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राघव चड्डा को राष्ट्रीय संयोजक का साथ देते पंजाब की समस्याओं की राज्यसभा में अनदेखी करने की बात कही।

चर्चायें यह भी चल रही हैं कि कहीं राघव चड्ढा, कांग्रेस के सांसद शशि थरूर की तरह अपनी ही पार्टी लाइन से हटकर ‘बोली’ तो नहीं बदलते जा रहे थे, जैसे पहलगाम कांड पर आलोचना की बजाय प्रधानमंत्री की तारीफ के वीडियो की बात भी सामने लाई जा रही है । यह भी चर्चा चल पड़ी है कि कहीं राघव चड्डा भाजपा में जाने की राह पर तो नहीं निकल पड़े? वैसे राघव चड्ढा की पत्नी और अभिनेत्री परिणिति चोपड़ा ने भी राजनीति में अपने पैरों पर खड़े होने जैसी बात सोशल मीडिया में कही लेकिन जल्दी ही डिलीट भी कर दी । आने वाले दिनों में पार्टी लाइन व पार्टी लाइन के अंदर या बाहर रहने की चर्चाओं को हवा मिलती रहेगी।

अभी राज्यसभा चुनाव के बाद से हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में भी पार्टी लाइन से बाहर जाकर वोट या क्राॅस वोटिंग करने की चर्चायें थम नहीं रहीं। पांच विधायकों को पार्टी हाईकमान ने कारण बताओ नोटिस थमा दिये, जिनमें से तीन विधायकों का जवाब है कि वे पार्टी लाइन के अंदर रहे और हमने वोट पर्यवेक्षक व पोलिंग एजेंट को दिखाये भी थे लेकिन हम पर विश्वास नहीं किया जा रहा। मेवात से दो विधायकों ने जवाब नहीं भेजा। एक ने तो पहले ही कह दिया था कि सोच समझकर पार्टी लाइन से हटकर वोट दिया यानी यह अंतरात्मा की आवाज़ रही होगी या कोई और कारण रहा होगा ! खैर, जब तब कांग्रेस में अंतरात्मा की आवाज़ उठती रहेगी तब तब घमासान मचता रहेगा। अब इन्हें पार्टी लाइन से बाहर जाने पर क्या फैसला आता है, इंतज़ार रहेगा।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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