केयू के 35वें दीक्षांत समारोह में 3000 विद्यार्थियों को डिग्री, 89 को गोल्ड मेडल — न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को मानद उपाधि
थानेसर, 4 अप्रैल (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी): हरियाणा के राज्यपाल एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में युवा पीढ़ी सबसे अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस लक्ष्य को एक राष्ट्रीय मिशन मानकर नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ें।
वे शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
3000 विद्यार्थियों को डिग्री, 112 को पीएचडी
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा करीब 3000 विद्यार्थियों को यूजी, पीजी और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं।
112 शोधार्थियों को पीएचडी डिग्री दी गई, जबकि 89 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को मानद उपाधि
इस अवसर पर न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को डॉक्टर ऑफ लॉ (मानद) उपाधि प्रदान की गई।
समारोह में न्यायमूर्ति शील नागू सहित कई न्यायाधीश भी मौजूद रहे।
“नौकरी मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें युवा”
राज्यपाल ने युवाओं को पारंपरिक नौकरी तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन को युवाओं के लिए मार्गदर्शक बताया।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का जिक्र
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर संतोष जताते हुए बताया कि:
- नैक से ए++ ग्रेड प्राप्त
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर प्लैटिनम अवॉर्ड
- शोध, पेटेंट और इंडस्ट्री 4.0 में उल्लेखनीय कार्य
राष्ट्र पहले, तभी व्यक्ति सशक्त: न्यायमूर्ति बिंदल
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती ही व्यक्ति की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सकारात्मक सृजन की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उस पर निर्भर न रहें
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक अवसर भी देती है और चुनौतियां भी, इसलिए विवेक और निर्णय क्षमता को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
“दीक्षांत समारोह नई शुरुआत है”
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों को गीता के “योगस्थः कुरु कर्माणि” सिद्धांत को अपनाने की प्रेरणा दी।








