हरियाणा में भवन नक्शा पास करने की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कार्यों में देरी स्वीकार नहीं : मुख्यमंत्री नायब सिंह  सैनी

वेस्ट वाटर रियूज सिस्टम को किया जाए मजबूत

2,276 सड़कों की पहचान कर मरम्मत करने की दिशा में नगर निकाय विभाग ने उठाए कदम

चंडीगढ़,3 अप्रैल- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में बनाई जाने वाली घरेलू एवं वाणिज्यिक इमारतों के लिए नगर निकाय विभाग से पास होने वाले नक्शों की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को भी सुविधा मिलेगी और प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा।  उन्होंने इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित करते हुए अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सचिवालय में शुक्रवार को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अर्बन चैलेंज फंड को लेकर भी अधिकारियों से अलग अलग पहलुओं पर चर्चा की। जिसके तहत अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस योजना के तहत हरियाणा में किए जाने वाले कार्य की योजना बारे पहलुओं को साझा किया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में वेस्ट वाटर के पुनः उपयोग (रीयूज) को लेकर भी गंभीरता से कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहरों में स्थापित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से निकलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इस पानी को पार्कों की सिंचाई, उद्योगों तथा कृषि कार्यों में प्रयोग में लाने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री, पार्क और खेती में इस ट्रीटेड पानी का प्रभावी उपयोग हो सके। बकायदा यह भी कहा गया कि एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से पार्क तक अथवा जहां पानी का इस्तेमाल होना है, वहां लंबी अवधि तक चलने वाले पाइप लाइन भी बिछाए जाएं। पार्क, ग्रीन बेल्ट में तो इसे लेकर व्यवस्था करने पर खासा फोकस किया जाए।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हरियाणा में भविष्य में जो भी नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे, उनमें रियूज वाटर सिस्टम का प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग हो।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मौजूदा सीवरेज व्यवस्था के संबंध में विस्तृत डेटा तैयार करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आंकलन किया जाए कि किन-किन क्षेत्रों में कब और किस जनसंख्या के आधार पर सीवरेज सिस्टम डाला गया था। वर्तमान समय में कई क्षेत्रों की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो कुछ स्थानों पर तीन गुना तक पहुंच चुकी है। ऐसे में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई रूपरेखा तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए:

मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “विकसित भारत” की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में कार्यों में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने नगर निकाय विभाग के सभी प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि टेंडर अलॉट होने के बाद कार्य लंबे समय तक लंबित न रहे। ठेकेदारों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करना होगा। यदि आवश्यकता हो तो अधिक मैनपावर, साधन और मशीनरी लगाकर कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि समय अवधि को कम किया जा सके।

सड़कों की संभाल पर खास फोक्स रहे:

बैठक के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा 16 हजार किलोमीटर सड़कों की जीआईएस मैपिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। ‘म्हारी सड़क’ ऐप के माध्यम से इन सड़कों से संबंधित प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, क्योंकि सरकार का मुख्य उद्देश्य जनता को बेहतर और सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि विभाग के अंतर्गत आने वाले हरियाणा के विभिन्न निकाय क्षेत्रों में कुल 2,276 सड़कों की पहचान की गई है। इनमें से 1,144 सड़कों का निर्माण 510.34 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इन सड़कों में कुछ ऐसी कच्ची सड़कें भी शामिल हैं, जो पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आती थीं, लेकिन अब नगर निगम सीमा में शामिल हो चुकी हैं।

इसी प्रकार 1,083 सड़कों का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई 591.51 किलोमीटर होगी और इस पर 594.91 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इसके अतिरिक्त 49 सड़कों को पैचवर्क के लिए चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 18.25 किलोमीटर है और इन पर 10.33 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विकास कार्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे हों, ताकि आमजन को बेहतर जीवन स्तर और सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता, अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ साकेत कुमार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) मिशन निदेशक श्री शाश्वत सांगवान भी मौजूद थे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!